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Friday, April 23, 2021

राजनीति कु घमासान (गढ़वळि कविता) - अनूप सिंह रावत

 नेतों का बीच
राजनीति कु घमासान
लग्यूँ छाई, लग्यूँ च
अर लग्यूँ हि रालो।
आम मनखि त
यूँका जाळ मा
फंस्यूँ छाई, फंस्यूँ च
अर फंस्यूँ हि रालो।

विपदा को बगत च
सब्बि जणदिना
अपड़ी पार्टी चमकौण
जनता जाओ भाड़ मा
बस कुर्सी हथ्यौण
जनता मंगणि च दवे-दारु
योन आरोप-प्रत्यारोप करि
अपडु वोट बैंक बढ़ौण।

राजनीति करा पर
बगत बि देखा जरा
विपदा आईं देश मा
मन्ख्यात त रैखा जरा
आम जनता से बि
'अनूप' को अनुरोध च
भै-भयात रख्यां तुम
बस गलत नीति विरोध च।

©® अनूप सिंह रावत
ग्वीन मल्ला, बीरोंखाल, गढ़वाल (उत्तराखंड)

Tuesday, February 9, 2021

आखिर कब तलक? (गढ़वळि कविता) - अनूप सिंह रावत


चमोली जिला मा ज्वा आपदा आयी वेकु जिम्मेदार मनखि ही च। प्रकृति दगड़ी लगातार होण वळी छेड़छाड़ येकु कारण च। ईं आपदा मा जतगा बि ल्वगोंल अपणी जान गँवे तौं तैं विनम्र श्रद्धांजलि। बद्री-केदार तौंका परिजनों तैं ईं दुःख की घड़ी से अग्नै बढ़णा कि हिक्मत द्या। कुछ पँक्तयों का माध्यम से अपणी बात रखणु छौं।


आखिर कब तलक देवभूमि मा

इनि निठुर आपदा आणि रैली

विकासकि दौड़ मा प्रकृति दगड़ी

मनखि कि छेड़छाड़ चलणी रैली


बिजली बणाण कु कब तलक

पहाड़ों मा इनि डाम बणणा राला

जीवन देण वळा गाड़-गदिना

निर्दोष ल्वगों को काळ बणि जाला


एका बाद एक परियोजना आणि च

विकास दगड़ी आपदा बि ल्याणि च

संसाधनों को बेरोकटोक दोहन होणो

देवभूमि तैं अब ऊर्जा प्रदेश बणाणि च


दिन मैना अर साल बि बदली

सरकार बि आण-जाण लगीं च

फिकर नि च कै तैं यों पहाड़ों कि

नौ कमाणै/कुर्सी बचाणै लगीं च


अबि बि बगत च रे चितै जावा!

प्रकृति को इनो अपमान न कारा

भगवानै दियीं अनुपम ईं भेंट कि

भविष्ये बाना सज समाळ कारा!!


- अनूप सिंह रावत

ग्वीन मल्ला, बीरोंखाल, गढ़वाल (उत्तराखंड)

#रावतडिजिटल #उत्तराखंड

Sunday, May 24, 2020

गरीब (गढ़वाली कविता) - अनूप सिंह रावत


आखिर वों थैं
गरीब दिखे ही गे
चलो कम से कम
दिखे त गे भै!
चाहे राजनीति कु
वोंकु चश्मा पैन्यू छाई वो त पैलि बिटि ही
जग्वाळ छाई
कि कैकि मी पर
जरा नजर त प्वाड़ली
मेरि ख़ैरि क्वी सुणळो
अर जरसि दूर ह्वे जैली
पर वेन यु त
कब्बि बि नि सोचि छौ
तौंकि नजर त सिरफ
अपणा फैदा कि च
वों तैं वेसे क्वी लेणु-देणु नि
वो त अपणी राजनीति कि
दुकान चलाण अयां छन
वैन नि जाणि छै कि
वैकु बीच सड़क पर
उ इनु मजाक उड़ाला
वैका दुःख/विपदौं पर
राजनीति कु ढोंग रचाला
खुट्यों का छालों दगड़ी
जिकुड़ि का घौ बि
हौरि दुखै जाला !!!
वु योंकि रजनीति कु
तमसु "बस" देख्दा रैगे
अर अपणी लाचारी पर
"बस" रूंदा ही रैगे.!!!

© अनूप सिंह रावत
रविवार, 24 मई 2020

Thursday, May 7, 2020

आज (व्यंग्य)


अजगाळ कै लोग लॉकडौन मा दान का नौ पर नेतागिरी चमकाण पर लग्यां छन। ये पर ही एक व्यंग्य लिखणा कि कोशिश करीं च। जन बि ह्वेळी अपणा विचार जरूर दियां।

एक कट्टा पिस्यूं
एक कट्टा चौंळ
द्वी दाणी अल्लु
द्वी दाणी प्याज
बंटण चाणु छौं मि आज

फ़ोटो-फाटो खिंचै
खूब प्रचार करण चाणू छौं आज
समाजसेवी कु रूप धरण चाणू छौं आज

कळजुग मा पुण्य कमै क्य कन
मी त नेता बणी नाम कमाण चाणू छौं आज
समाजसेवा को बानो बणै
लाॅकडौन मा भि भैर घूमी आण चाणू छौं आज

भोळा साल चुनौ छन
अबि से तैयारी कनू छौं आज
ल्वगुं तैं दिखाण त पड़लो
कि मि तुमरा बान म्वनू छौं आज।

- अनूप सिंह रावत
ग्वीन मल्ला, बीरोंखाल, गढवाळ (उत्तराखंड)

Wednesday, February 26, 2020

अनूप सिंह रावत की "प्रेम कहानी" (गढ़वळि कविता)


प्रेम कहानी मेरी शुरू हूंदा-हूंदा रै ग्याई।
माया कि जोत जलण से पैली बुझि ग्याई।।

बाळापन की माया मेरी ज्वान क्या ह्वाई,
तैंका बुबन वीं थैं दूर मुलुक बिवें द्याई।
दिल की बात म्यारा दिल मा ही रै ग्याई।।

स्कूल बिटी फिर कॉलेज कु बाटू ह्वे ग्याई,
प्रेम कु फूल दिल मा खिलण लगि ग्याई।
म्यारा ब्वलण से पैली वा हैंकन पटै द्याई।।

पढ़ै-लिखै पूरी ह्वेकि नौकरी मिलि ग्याई,
स्वाणी बांद एक म्यारा दिलमा बसि ग्याई।
पर वा भारी निठुर हृदै कि निकळी ग्याई।।

बगत दगड़ी अरेंज मैरिज कि बात ह्वाई,
कै जगों मेरु टिपड़ा बि झट्ट मिलि ग्याई।
कखि मेरि कखि वोंकि समझम नि आई।।

© 24-02-2020 अनूप सिंह रावत

Thursday, January 16, 2020

नाचा छमाछम (व्यंग्य)


ढ़ोल बजे घमाघम
दमौ बजे टमाटम
गीतेर तू गीत लगा
स्टेज मा झमाझम
टिकट लीगे हौरि क्वी
तुम नाचा छमाछम

तू कौथिग उर्याणु रै
नेतों थैं बुलाणु रै
एक दिन कु त्यौहार
हफ्ता भर मनाणु रै
अतिथि सत्कार कनु रै
फूलमाला पैनाणु रै

नेतों को क्या चा
वु आणा ही राला
बुसिला भाषण देकि
अफ जनै कैरि जाला
तुम बगैर नि जितणु
शब्दबाण घुचे जाला

तू झण्डा उठाणी रै
पोस्टर चिपकाणी रै
तू कुर्सी लगाणी रै
तू दर्री ही बिछाणी रै
सिर्फ कार्यकर्ता बणी
वोटर लिस्ट बणाणी रै

कब तक ठगेणु रैली
मंडाण मा नचणु रैली
पर्वतीय प्रकोष्ठ पर तू
कब तक इतराणु रैली
पार्ट्यों पिछिन्या दौड़ी
झणि कब टिकट पैली

© 16-01-2020 अनूप सिंह रावत

Friday, December 7, 2018

दादाजी की पिट्ठी मा


दादाजी की पिठ्ठी मा
खूब घुम्यों मैं भी
कभि तल्या ख़्वाल
कभि मल्या ख़्वाल
माँजी गई जब
धाण-काज कु
त बण्यां मेरा रख्वाल
मेरी गाड़ी त बस
दादाजी की पिट्ठी छायी
ज्वा सर्या गौं का
दर्शन करांदी छायी
अब त बालापन का
दिनों याद करि कि
भारी खुदेणों छौं
बैकुण्ठवासी दादाजी
तुम थैं नमन कनों छौं।

©® अनूप सिंह रावत "गढ़वाली इंडियन"
दिनांक: 07-12-2018 (शुक्रवार)

Wednesday, November 14, 2018

बळ विकास नि हूणु च !!!


कु ब्वनु च कि विकास नि हूणु च
इनै आवा जरा तुम थैं दिखांदू छौं
देखा त सै फिर बोल्यां तुम इनु
मनरेगा मा खड़ोला खैंड्या छन
ढया-ढयों मा जरा देखि कि आवा
पाणी नि अटकुदु व अलग बात च
बांजा ह्वेगेनी जब पुंगड़ा तब
नैर (कूल) बणी च पुंगिड्यों कु
सूखा रौंलू मा व अलग बात च
सड़क पौंछि गैनी सभ्या गौं मा
कच्ची सड़िक्यों बान पहाड़ उजाड़ी
सड़क दुर्घटना हूणी अलग बात च
स्कूल खुल्यां छन गौं-गौं मा
दाल-भात की सपोड़ा-सपोड़
मास्टर नि छन व अलग बात च
जगा-जगों अस्पताल बण्या छन
जख न डॉक्टर मिलदा न दवै
मरीज प्रदेशों रैफर अलग बात च
नेता जी क विकास को त क्या ब्वन
गौं का बाटा-घाटा चपट कैरी
दून सैटल ह्वेगी व अलग बात च
विकास की त कै कहानी छन
जु तुम लोगों त सुणानि छन
अबि खुण इतगा भौत च..!!!

©® अनूप सिंह रावत "गढ़वाली इंडियन"
दिनांक: 14-11-2018 (बुधवार)

Wednesday, October 24, 2018

चुनौ कु शंखनाद


चुनौ कु शंखनाद ह्वेगे
हर दल मा घमासान ह्वेगे
अपड़ा बिरणा ह्वेगे त
बिरणा बळ अपड़ा ह्वेगे
पार्टी टिकट पौणा कु
हर कैन खूब जोर लगै
जैथै नि मिलु त वो
बळ निर्दल खडु ह्वेगे
गौं ख्वलों अर सैरों म
नेतों से ज्यादा तौंका
चमचों कु घपरोळ ह्वेगे
जण चारेक दिनों कु बळ
फ्री पीणा कु इंतजाम ह्वेगे
नेता देणा छि बुसिल्या भाषण
जनता बिचारि ताळी बजाणी
ये आस मा कि ऐंसु भलु होलु
अर नेता जी फिर झणी
टोपळी पैने की चलिगे।।

©® 2018 अनूप सिंह रावत

Monday, August 20, 2018

दैत ऐगेनी देवभूमि मा


दैत ऐगेनी देवभूमि मा
तख का मनिख्यों कु
सुःख चैन छन लूटणा
नजर च तौं कि
पहाड़ा बेटि-ब्वार्यों पर
दिन दुगणा रात चौगुणा
स्यु अपराध कन्ना छन
अभि भी बगत च चितै जावा
उठा जागा भै-बैण्यों
तौं का कुकर्मों से देवभूमि
गंदी नि हूणि द्यावा
कळजुग का धृतराष्ट्र
नेता अफ़सर चुपचाप देखणा
पंडो सि मजबूर नि ह्वावा
नि आणु कृष्ण भगवान ळ
अफि उठो हथियार अर
जख पकडेणा स्यु दैत
उठो अफि हथियार अर
काटी द्यो तखि तौंका गौळा

©® अनूप सिंह रावत

Tuesday, August 14, 2018

जरा याद कैरि ल्यावा


जौं ळ देश का खातिर
अपड़ी कुर्बानी दे छायी
जरा द्वी घड़ी कु ही सै
याद तौं भी करि ल्यावा
आज़ाद छावा जौंका भ्वार
अपड़ी बात रखणा छावा
जान गवैं जौंळ देश की
मान-मर्यादा राखि संभाली
तौं की जयकार ब्वाला
सौं घैंटा आज सभ्या कि
मिली जुलि की सदनी रौंला
ये जुग-जगत मा देश कु
नौ रोशन कैरि द्योंला।।

©® अनूप सिंह रावत

Tuesday, June 26, 2018

रैबार


रैबार भेजि त छै
पर मिलु नि वों थै झणि
तबि नि आया अजों तळक
य फिर सब कुछ समझिकी
अणसुण्या कन्ना होळा
कि कब बिटि छौं जग्वाळ
तौं कि मुखुड़ि देखणा कु
चैंठी कि भुकि पेणा कु
बस इतगा त चांदु मी कि
जब तळक साँस चलिणी च
य कूड़ी इनि टिकी च
तुम आणा-जाणा रावा...

©® 2018 अनूप सिंह रावत

Friday, May 25, 2018

सुपिन्या


सुपिन्या भि कभि-कबार
बकि-बाता का ह्वे जांदी
जनु कि ब्याळि रात ह्वे
क्या देखुणु छु कि
खाली पड्यां गौं-गुठ्यार
फिर से भ्वर्याँ छन
वल्या पल्या छाल फिर
मनिख्यों कु घपरोल
बांजा प्वड़्यां पुंगिड्यों म
धाण-काज करदा लोग
बाजारों म भारी रौनक
आंदा-जांदा बटोयों बहार
पंदेरों म बंठों की लैन
बांसुली बजांदा ग्वरेल
हैंसदा खेलदा गांदा गीत
मुल्क की निभांदा रीत
कच्ची पक्की सड़क दिखे
तौं पर हथ जोड़ि वोट मंगदा
जनि मिथै एक नेता दिखे
तनि फट्ट निंद टूटिगे
मनमोहण्या सुपिन्यु मेरु
झणी कख हर्चिगे !!!

©®2018 अनूप सिंह रावत