ना बांस तू घुघुती घूर-घूर
परदेश छन स्वामी दूर-दूर
मेरु सन्देश ली उडिजा फूर-फूर
फोटो देखि की मन थे बुथ्याणु
राजी ख़ुशी रयां देवतों मनाणु
ड्यूटी लगीं होली कश्मीर बोर्डर
दुश्मन ऐग्याई बल सरकारी ऑर्डर
सरेल मेरु यख मन उमा लग्युंचा
ज्यू पराण मेरु हे तौमा लग्युंचा
हम कुशल छावा चिंता नि कर्यान
स्वामी आप अपरू ध्यान धर्यान
फुर्र उडी जा दी ली जा मेरु संदेशा
तुम दगडी राली मेरी माया हमेशा
लड़े जीती की स्वामी घार अयान
गढ़वाल रायफल कु मान रख्यान
जीती आवा झठ बैठ्यों छौं जग्वाल
दगडी खेलला स्वामी इगास बग्वाल
ना बांस तू घुघुती घूर-घूर
परदेश छन स्वामी दूर-दूर
मेरु सन्देश ली उडिजा फूर-फूर
सर्वाधिकार सुरक्षित © अनूप सिंह रावत
"गढ़वाली इंडियन" दिनांक -२२-०२-२०१२
बीरोंखाल, पौड़ी गढ़वाल (उत्तराखंड)
इंदिरापुरम, गाजियाबाद (उत्तर प्रदेश)
कब होगी फिर वो सुबह
देश मेरा बदल जायेगा
राम राज्य फिर से आयेगा
कब मिटेगी यहाँ गरीबी
भेद भाव छोड़कर सब
होंगे एक दूसरे के करीबी
कब छोड़ेंगे डर-२ कर
इस देश के लोग जीना
आतंकवाद रहे कहीं ना
नेताओं के वादों में जब
फिर कोई ना फंसेगा
ईमानदार को जब चुनेगा
छोड़ देंगे वैर भाव सब
होगी वो हसीन सुबह कब
जिंदगी खुश होगी तब
गीत खुशियों के गायेंगे
फूल खुशियों के खिलेंगे
सारे दुःख दर्द जब मिटेंगे
मिलाओ कदम से कदम
आओ शपथ ले आज हम
वो सुबह लेकर आयेंगे हम
कब होगी फिर वो सुबह
देश मेरा बदल जायेगा
राम राज्य फिर आयेगा
सर्वाधिकार सुरक्षित © अनूप सिंह रावत
"गढ़वाली इंडियन" दिनांक -१५-०२-२०१२
बीरोंखाल, पौड़ी गढ़वाल (उत्तराखंड)
इंदिरापुरम, गाजियाबाद (उत्तर प्रदेश)
सभी कहे इस को प्यार का दिन
कहें नही जी सकते हम तुम बिन
प्रीत की रीत ऐसी हो आयी
आज अपनी कल हो जाये परायी
आज एक तो कल दूसरी फँसायी
पसंद आयी तो साथ ले भगायी
चाँद तारे तोड़ने की करते हैं बात
रूठकर छोड़ देते हैं पल भर में साथ
इनको मतलब पता नही प्यार का
खेल समझते हैं इसे ये इकरार का
आज यह तो एक फैशन हो गया है
लवर नही तो इनको टेंशन हो गया है
भारतीय पर्वों से ज्यादा इसे मनाते
माँ बाप के मेहनत के रुपये हैं लुटाते
रीत अपनी छोड़कर दूसरी अपनायी
हे प्रभु यह प्रीत की रीत कैसी हो आयी
सर्वाधिकार सुरक्षित © iamrawat
अनूप सिंह रावत "गढ़वाली इंडियन"
बीरोंखाल, पौड़ी गढ़वाल, उत्तराखंड
दिनांक - १४-०२-२०१२ (मंगलवार)
अबकी बार जब मी गयुं घार
कुछ सूनु सी लगी मिथे गौं गुठ्यार
खाली - खाली छै मेरी छज्जा तिबार
जब नजर फेरी मिन वार प्वार
तबरी पल्या खोला की बोडी
दिखे ग्यायी मिथे गैल्यो हफार
पूछी मिन किले हे बोडी
छन यु गौं गुठ्यार खाली - खाली
बोडी बोली यनी छन वल्या पल्या छाली
सबकू काम मा साथ देणु वालू
सरया गौं मा एक चतरू ही छायी
यनी बीमारी लगी की वी भी नि रायी
कुड़ी पुन्गुड़ी लोग छोड़ी चलि गेनी
गौं का गौं अब ता रीता ह्वेगेनी
पुन्गुड़ी बांजी अर कुड़ी उजदडा ह्वेगेनी
मल्या खोला का भगतु न भी
अबकी बार झणी बारा कैरी याली
उ भी नौकरी का बान परदेश चलि ग्यायी
बुढया लोग ही रैगेनी अब ब्यटा घार मा
ज्वान बैख सब चलि गेनी परदेश मा
बैठ्या छावा कब आला हम भी सार मा
सूनी ह्वेगेनी ब्यटा जन्दरी उरख्याली
परदेश मा बसी गेनी झणी किले सब उत्तराखंडी
सभ्या मेरा सगी सम्बन्धी कुमाउनी अर गढ़वाली
मिन बोली बोडी चल सब ठीक ह्वे जालु
आली जब यार घार की तब लौटी की आला
जख भी राला सभी एक दिन जरूर आला...
अबकी बार जब मी गयुं घार
कुछ सूनु सी लगी मिथे गौं गुठ्यार
खाली - खाली छै मेरी छज्जा तिबार
सर्वाधिकार सुरक्षित © अनूप सिंह रावत
"गढ़वाली इंडियन" दिनांक -१३-०२-२०१२
बीरोंखाल, पौड़ी गढ़वाल (उत्तराखंड)
इंदिरापुरम, गाजियाबाद (उत्तर प्रदेश)
मैकु मुंडारु कनि च या मेरी भैंसी मरख्वाली
ईना सरया गौं गुठ्यार मा बबाल मचैयाली..
बाटा की छन्नी च मेरी बाटू ईन घेरी याली
क्या बिंगो मैकू कतगा आफत करियाली..
ब्याली ईन गौं की प्रधानी बौजी दयाई मारी
प्रधान भैजी न मिथे सुणे गाली खूब खारी..
यनी मरख्वाली च कि कैल नि या लिजाणी
ईन करी याली मेरी सेणी खाणी निखाणी..
पाणी खाणा कु या जब रौली गदिन्यों जांदी
ल्वगों का गोरों थे या वख मरणी लगी रांदी..
हारू धारू घास पाणी इन्कू सब कुछ चयेंदी
दूध का नाम पर या त ल्वथ्या भर ही देंदी..
मैकु मुंडारु कनि च या मेरी भैंसी मरख्वाली
ईना सरया गौं गुठ्यार मा बबाल मचैयाली..
सर्वाधिकार सुरक्षित © अनूप सिंह रावत
"गढ़वाली इंडियन" दिनांक -१०-०२-२०१२
बीरोंखाल, पौड़ी गढ़वाल (उत्तराखंड)
इंदिरापुरम, गाजियाबाद (उत्तर प्रदेश)
कै दिन मैना सालों बिटिन अपडा मैत्या मुल्क नि गायी
धारा मंगरूं, बांजा जड्यूं कु ठंडो मीठो पाणी नि प्यायी...
कनि होली व मेरी कुड़ी पूंगुडी मेरी छन्नी छज्जा तिबारी
जौं बाटों मा हिटणु सीखू कब हिटलू ऊमा फिर सरासारी..
झणी कब बिटि नि देखि मिन चैता कु फूल्यों लाल बुरांश
घुघूती की घुर घुर, कफुआ, मोर, बणों मा बंसदी हिलांश..
किन्गोड़ा हिंशोला नि खायी, बेडू, मेलु, तिमला की दाणी
छंछ्या पल्यो बाड़ी, प्याज अर कंडली की भुज्जी स्वाणी..
बांदो का गीत नि सूणा, बाजूबंद, थड्या, चौंफला ऊ गीत
थाडो मा नाचणा की कनि प्यारी च व मेरा मुल्क की रीत..
उ सारयूं मा काम काज, रोपणी, बाणी कमाणी नि कायी
छैलू मा बैठी की, प्याज पिरान्यां कोदा कु रोटु नि खायी..
ब्यो बरात्यों मा पंगत मा बैठी की खाणु, अर रांसू मंडाण
स्याल्यूं का दगडी ठठा मजाक, अप दगडी उ खूब नचाण..
झणी कब बिटि की गैल्यों गौं का थोला मेलु मा नि गायी
दगिद्यों दगडी पात मा ताती - २ जलेबी पकोड़ी नि खायी..
कब जौंलू मी देवभूमि मा अपड़ा स्वाणा रौंतेला गढ़ देश
नि रयेंदु अब यख ता, विराणु सी लगदु गैल्यों यु परदेश..
कै दिन मैना सालों बिटिन अपडा मैत्या मुल्क नि गायी
धारा मंगरूं, बांजा जड्यूं कु ठंडो मीठो पाणी नि प्यायी...
सर्वाधिकार सुरक्षित © अनूप सिंह रावत
"गढ़वाली इंडियन" दिनांक -०९-०२-२०१२
बीरोंखाल, पौड़ी गढ़वाल (उत्तराखंड)
इंदिरापुरम, गाजियाबाद (उत्तर प्रदेश)
चल तू मेरा ढांगा रे
बैदे जरा द्वि फांगा रे
तेरी गुसैण आणि च
त्वेकू पींडू ल्याणि च
तेरु मेरु ख्याल रखद
व त मेरी स्याणि च
त्वी छै मेरु धन सारु
रोजगार त्वी छै म्यारू
तभी आण रे दवे दारु
तबि त हूण रे गुजारु
काम काज कु बगत
फिर बौडी की ऐगे रे
सारी पुन्गिद्यों मा हे
बै - बूते शुरू ह्वेगे रे
मी हल्या तू ब्वल्द
बांजा करि दे चल्द
अनाज हमन उगान
सरया दुनिया ब्वल्द
पुन्गिडी छं ऊँची नीचि
ढुंगी देखि की तू खींचि
नाज उगी जालु जब
फिर दयोंला वै सींचि
अनाज मेरु बाकी तेरु
हारू भारू हे घास सैरु
गैल्या सूण टक्क तू
सदनी कु साथ तेरु मेरु
चल तू मेरा ढांगा रे
बैदे जरा द्वि फांगा रे
सर्वाधिकार सुरक्षित © अनूप सिंह रावत
"गढ़वाली इंडियन" दिनांक -०६-०२-२०१२
बीरोंखाल, पौड़ी गढ़वाल (उत्तराखंड)
इंदिरापुरम, गाजियाबाद (उत्तर प्रदेश)
कभी सोचता हूँ दोस्तों मैं भी नेता बन जाऊं.
किसी का करूँ न करूँ अपना भला कर जाऊं.
आम रहकर कुछ कर पाऊँ या न कर पाऊं.
नेता बनकर मैं शायद बहुत कुछ कर जाऊं.
हाथ जोडू पहले मैं फिर ओरों से खूब जुड़वाऊं.
किसी भी तरह अपनी साफ छवि मैं दिखलाऊँ.
अपने पीछे पीछे घूमने वाले मैं चमचे बनाऊं.
अपनी जय जयकार तब रोज मैं भी करवाऊं.
ईमानदार रहकर मैं कुछ शायद न कमा पाऊं.
भ्रष्ट बनकर शायद विदेशों में खाता खुलवाऊं.
वादों की झड़ी लगाकर जनता को मैं रिझाऊं.
जीतने के बाद मैं भी अपनी शक्ल न दिखाऊं.
कभी इस दल में कभी उस दल में मैं भी जाऊं.
कोई टिकट न दें तो निर्दलीय ही मैं उतर जाऊं.
छोटे से घर में रहता हूँ मैं भी बंगला बनवाऊं.
काम काज के लिए तब मैं भी नौकर रखवाऊं.
लालबत्ती वाली गाड़ी तब मैं भी खूब घुमाऊँ.
बड़े - बड़े अफसरों से मैं भी सलामी करवाऊं.
कभी - कभी गरीबों में मैं भी कम्बल बट वाऊं.
और किसी भी तरह अपना वोट बैंक मैं जमाऊं.
कुर्ता पायजामा मैं पहनू टोपी ओरों को पहनाऊं.
कभी यहाँ तो कभी वहाँ मैं भी रैली खूब करवाऊं.
पर अंत में सोचता हूँ दोस्तों कैसे नेता बन पाऊं.
बनने के लिए पर मैं इतना रुपया कहां से लाऊं.
फिर सोचता हूँ दोस्तों मैं अपनी कलम ही चलाऊं.
खूब लिखूं इन सब पर मैं सबको बात समझाऊं.
सर्वाधिकार सुरक्षित © अनूप सिंह रावत
"गढ़वाली इंडियन" दिनांक -०२-०२-२०१२
बीरोंखाल, पौड़ी गढ़वाल (उत्तराखंड)
इंदिरापुरम, गाजियाबाद (उत्तर प्रदेश)
सुण रे दिदा गीत मिन सदानी गाण
उत्तराखंड च हे मेरु मुल्क मेरु पराण
पंच प्रयाग, पंच बद्री केदार छन यख
देवभूमि मेरु पहाड़ देवों कु वास यख
गंगोत्री यमनोत्री, भागीरथी मैत जख
धन भाग हमरु जु हम जन्म लेनी यख
ऊँची निची डांडी कांठी छन हैरा बुग्याल
चम चम चमकणु स्वाणु ऊँचो हिमाल
मनखी बस्यां छन वल्या पल्या छाल
रंगीलो कुमाऊ मेरु छबीलो गढ़वाल
लएयां पैयां फ्योली फूली बांज बुरांश
कफुआ मोर घुघूती बसणी च हिलांश
कनु भलु लगदु यख बरखुंदु चौमास
बेडू पक्यां रैन्दन यख त हे बारामास
हिंशोला किन्गोड़ा काफल तिमला दाणी
सेव अनार आम माल्टा नारंगी की दाणी
छ्वाल्या धारा मंगरू कु ठंडो मीठो पाणी
मेहनत भारी होंदी यख खाणी कमाणी
वीरों भडु कु मेरु बावन गढ़ों कु देशा
देश का बाना म्वारणा कु तैयार हमेशा
मेरा कुमाऊ गढ़वाल रैफल का जवान
बोर्डर पर छन कमर कसी देश का बान
ज्यू पराण मेरु कखी होरी नी लगदु
पुनर्जन्म हो त यखी फिर मी मंगदु
हे प्रभु सुणि ले रावत अनूप की पुकार
कुशल राखी सदानी मेरु गौं गुठ्यार
सुण रे दिदा गीत मिन सदानी गाण
उत्तराखंड च हे मेरु मुल्क मेरु पराण
सर्वाधिकार सुरक्षित © अनूप सिंह रावत
"गढ़वाली इंडियन" दिनांक -३१-०१-२०१२
बीरोंखाल, पौड़ी गढ़वाल (उत्तराखंड)
देखा गैल्यों बसंत ऋतु फिर बौडी ऐगे.
डांडी काठ्यूं मा फिर हरियाली छैगे...
फूल पाती कनि सजिणी छि देखा हफार.
बौडी की ऐगे फिर घर-बणों मा मोळ्यार..
चखुला भी देखा कना रंगमत फिर ह्वेगेनी.
बनी - बनी की आवाज पहाड़ों मा छैगेनी..
रूडी आई छौ सब अप दगिडी लीगे छौ.
फिर ह्युंद मा सब थर थर कौन्पीगे छौ..
रंग रंगीली बहार मा ब्वाला हे झुमैलो.
थड्या चौफला आज ज्यूँ भोरी की खेलो..
सारी पुन्गिदियों मा काम कु बगत ऐगे.
हैल, कुटुलू, दथुड़ी सब तैयार फिर ह्वेगे..
लइयां पैयां फ्योली फूली बांज बुरांश.
कफुआ मोर घुघुती बसिणी हिलांश..
देखा गैल्यों बसंत ऋतु फिर बौडी ऐगे.
डांडी काठ्यूं मा फिर हरियाली छैगे...
सर्वाधिकार सुरक्षित © अनूप सिंह रावत
" गढ़वाली इंडियन " दिनांक -२८-०१-२०१२
इंदिरापुरम, गाजियाबाद (उत्तर प्रदेश)
तुम्हारी माया मा बौल्या ह्वेग्युं मी हे छोरी देस्वाली.
ज्वानी की रौंस मा लतपथ बणी चा छोरी देस्वाली.
माया मा इन्कु अलझे ग्यायी छोरा 'अनु' गढ़वाली.
संभाली की भी नि सम्भलेंदी या निर्भे ज्वानी हाँ.
मेरु चित मन चोरी ली ग्यायी मुखुड़ी स्वाणी हाँ.
झणी किले यु दिल करुनु रेंद विंकि ही जग्वाली.
माया मा इन्कु अलझे ग्यायी छोरा 'अनु' गढ़वाली.
दिखेण मा सरम्याली सी पर नखरा छन हजार.
क्या दन लगदी या बांद जब करदी सज श्रृंगार.
ईं बांद कु रंग रूप न मेरु चित मन चोरी याली.
माया मा इन्कु अलझे ग्यायी छोरा 'अनु' गढ़वाली.
मीठु बुलाणु गैल्यों गैल इन्कु मुल मुल हैन्सणु.
अर चोरी चोरी नजर बचे की मिथे इन्कु देखणु.
दिल मा विंकि भी मेरु ख्याल मैन यु जाणियाली.
माया मा इन्कु अलझे ग्यायी छोरा 'अनु' गढ़वाली.
ओंठडी चुप रैंदी मायामा पर आँखी सब बिगान्दी.
दुनिया दुश्मन होंन्दी माया की पर डर नि रांदी.
होलू जू भी दिखे जालू मिन भी यु अब ठरियाली.
माया मा इन्कु अलझे ग्यायी छोरा 'अनु' गढ़वाली.
सर्वाधिकार सुरक्षित © अनूप सिंह रावत
" गढ़वाली इंडियन " दिनांक -२५-०१-२०१२
इंदिरापुरम, गाजियाबाद (उत्तर प्रदेश)
२६ जनवरी गणतंत्र दिवस फिर से आयी है.
इंडिया गेट राजपथ पर परेड होने आयी है..
देश की विभिन्न संस्कृति देखने को मिलेगी.
जब झाकिंयां हर राज्य की फिर से आयेगी..
जाबांजी दिखाने फिर सेना के जवान आयेंगे.
हर रायफल के जवान परेड करते जब आयेंगे..
स्कूली बच्चे भी अपना हुनर दिखाने आयेंगे.
सेना के जवानों से कदम से कदम मिलायेंगे..
देखेगी सारी दुनिया राजपथ से शक्ति हमारी.
जय जयकार होगी हिंदुस्तान की तब भारी..
देश के शहीदों को याद करेंगे जयकार होगी.
देशभक्ति गीतों की भी साथ में भरमार होगी..
भारत माता की जय जयकार के नारे गूंजेंगे.
हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई सभी भाई आयेंगे..
शपथ लें सब आज मिलकर देश को बचाना है.
इस देश की खातिर हमको मर मिट जाना है..
जय भारत, भारतीय एकता, जय हिन्दुस्तान.
जय जवान, जय किसान, जय हो विज्ञान...
भारत माता की जय वन्देमातरम् इन्कलाब जिंदाबाद
महात्मा गाँधी अमर रहे, राष्ट्रीय एकता जिंदाबाद...
सर्वाधिकार सुरक्षित © अनूप सिंह रावत
" गढ़वाली इंडियन " दिनांक -२३-०१-२०१२
इंदिरापुरम, गाजियाबाद (उत्तर प्रदेश)