आखर छौं मी गठ्याणु
मन की बात छौं मी बिंगाणु
पहाड़ों कु वासी छौं मी
देवतों का थौं छन जख
हे उत्तराखंड कु छौं मी
अपड़ी सार छौं मी लगाणु
आखर छौं मी गठ्याणु
मन की बात छौं मी बिंगाणु
जन्मभूमि छोड़ी की अयुं
दूर परदेशों बस्युं छौं मी
भारी खुदेणु यख छौं मी
मन थै छौं मी बुथ्याणु
आखर छौं मी गठ्याणु
मन की बात छौं मी बिंगाणु
द्वी रुप्यों का बाना मेरु
गौं, मुलुक, छोड्यूं च डेरु
छौं वख जख क्वी नि मेरु
जिंदगी थै छौं मी धक्याणु
आखर छौं मी गठ्याणु
मन की बात छौं मी बिंगाणु
कब बिटि गौं नि गायी
ठंडो मीठो पाणी नि प्यायी
ब्वे हाथों कु खाणु नि खायी
बेस्वाद यख छौं मी खाणु
आखर छौं मी गठ्याणु
मन की बात छौं मी बिंगाणु
कभी ह्युंद त कभी गरमी
यख त देखा पराण तडपी
जिंदगी च जाल मा जकड़ी
खैर अपड़ी छौं मी लगाणु
आखर छौं मी गठ्याणु
मन की बात छौं मी बिंगाणु
अब नि रैणु यख त मिन
ध्याड़ी मजदूरी जू भी कन
भौत ह्वेगे अब छौं जाणु
अपड़ा मुलुक छौं मी जाणु
आखर छौं मी गठ्याणु
मन की बात छौं मी बिंगाणु
सर्वाधिकार सुरक्षित © अनूप सिंह रावत
“गढ़वाली इंडियन” दिनांक: २९-०९-२०१२
Tuesday, October 30, 2012
आखर छौं मी गठ्याणु
Wednesday, October 17, 2012
सर बिरोली
सर बिरोली जब भी आंद,
अन्याड़ सदानी कैरी जांद।।
द्वार ढ़ोंग्यां रैंदा पट्ट,
पर खोली देंदी स्या चट्ट।
दूध की भांडी पेयी जांद।
सर बिरोली जब भी आंद,
अन्याड़ सदानी कैरी जांद।।
सुबेर कल्या रोटी पकायी,
तिबारी डिडांळी साफ़ कायी।
तब तक स्या सब खै जांद।
सर बिरोली जब भी आंद,
अन्याड़ सदानी कैरी जांद।।
कल्यो दे कैन जलोठा धरयुं,
स्यूं भी सीं बिरोली ना खयुं।
सब गायी निर्भगी का प्याट।
सर बिरोली जब भी आंद,
अन्याड़ सदानी कैरी जांद।।
छै मेरी कुछ कुखुड़ी सैंती,
वु भी छनी से भैर खैंची ।
छि भै भारी नुक्सान कै जांद।
सर बिरोली जब भी आंद,
अन्याड़ सदानी कैरी जांद।।
ढुंढणु छौं पर हथ नि आणी,
अन्याड़ कनी मूसा नि खाणी।
छडम ह्व़े त निंद उडी जांद।
सर बिरोली जब भी आंद,
अन्याड़ सदानी कैरी जांद।।
सर्वाधिकार सुरक्षित © अनूप सिंह रावत
"गढ़वाली इंडियन" दिनांक: १७-०९-२०१२
Wednesday, October 3, 2012
हिंदी शायरी By Anoop Rawat
प्रेम का रोग भी बड़ा अजीब है
देखता न अमीर न गरीब है...
चाहे कितने भी पहरे लगा लो,
प्रेमी एक दूजे के सदा करीब हैं.
अनूप रावत "गढ़वाली इंडियन"
Date: 03-09-2012
Thursday, September 27, 2012
जनता भ्रष्टाचार से त्रस्त है
जनता भ्रष्टाचार से त्रस्त है
सरकार घोटालों में व्यस्त है
जनता बीमारियों से ग्रस्त है
पर सारे नेता लोग स्वस्थ हैं
महंगाई भी देखो बड़ी मस्त है
गरीबों की हालत बड़ी पस्त है
सरकार जनता को वादों की
लगा रही बार-२ बस गश्त है
जनता भ्रष्टाचार से त्रस्त है
सरकार घोटालों में व्यस्त है
सर्वाधिकार सुरक्षित @ अनूप रावत
"गढ़वाली इंडियन"
दिनांक - २७-०९-२०१२
Tuesday, September 4, 2012
हिंदी शायरी By Anoop Rawat
Saturday, September 1, 2012
गढ़वाली शायरी By Anoop Rawat
Tuesday, August 14, 2012
१५ अगस्त, स्वतंत्रता दिवस
१५ अगस्त, स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।
थाम तिरंगा हाथ में, आओ मिलकर जश्न मनाएं ।।
दे सलामी तिरंगे को, राष्ट्रगान, राष्ट्रगीत हम गाएं।
आओ मिलकर आज हम जगह -२ तिरंगा फहराएं ।।
याद करें उन अमर जवानों, शहीदों को आज हम,
जो इस भारत देश की खातिर मर मिट गए ।
दी प्राणों की आहुति, देश के सुगम भविष्य के लिए,
जो लौटकर न आये और अमर जगत में हो गए ।
वीरों का गुणगान करें, देशभक्ति के हम गीत गाएं ।
आओ मिलकर आज हम जगह -२ तिरंगा फहराएं ।।
सीमा पर सीना ताने हैं खड़े, प्रहरी सेना के जवान,
खेत खलियानों में मेहनत करते देश के किसान।
सम्पूर्ण भारतवर्ष से दूर करेंगे हम अब अज्ञान,
हर किसी को शिक्षा मिले शुरू करें ये अभियान ।
चलो जवानों का, किसानों का हम हौंसला बढ़ाएं ।
आओ मिलकर आज हम जगह -२ तिरंगा फहराएं ।।
कृषि, कला, विज्ञान, वाणिज्य में आगे बढ़ेंगे,
करें जतन कुछ ऐसा विश्व में परचम फहराएंगे।
तन मन धन से इस देश की हम सेवा करेंगे,
भारतीय संस्कृति को सम्पूर्ण विश्व में फैलायेंगे।
विश्व पटल पर "भारत" नाम स्वर्णिम अक्षरों में लिखाएं।
आओ मिलकर आज हम जगह -२ तिरंगा फहराएं ।।
जांति-पांति, धर्म का भेदभाव छोड़ कर आगे बढ़ें,
कोई छोटा, न कोई बड़ा, एक दूजे के गले मिलें।
हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई हम सब हैं भाई-भाई,
इस देश की खातिर कन्धा से कन्धा मिलाकर चलें।
भाईचारा है भारत की ताकत सम्पूर्ण विश्व को दिखलाएं।
आओ मिलकर आज हम जगह -२ तिरंगा फहराएं ।।
अमर शहीदों को रावत अनूप का शत-शत नमन,
शपथ लें देश से भ्रष्टाचार, आतंकवाद का करेंगे दमन।
एक कुटुम है भारत प्यारा, फैलाएं देश में चैन अमन,
खिलें खुशियों से हर चेहरा, मुस्कुराएं सारा चमन।
बाँटें खुशियाँ आज हम और चादर प्रेम की बिछाएं।
आओ मिलकर आज हम जगह -२ तिरंगा फहराएं ।।
सर्वाधिकार सुरक्षित © अनूप सिंह रावत
"गढ़वाली इंडियन" दिनांक: १४-०८-२०१२
Monday, August 13, 2012
जोगी एक देखि मैन
जानू छाई सफ़र मा बैठी कि ट्रेन मा,
ज्वान सी जोगी एक देखि मैन हाँ ।।
पूछी मिन वैसे किले रे त्वेन,
सन्यांस जवानी मा ल्याई त्वेन,
घर गृहस्थी से मन मुड़ी ग्यायी,
इले ही सन्यांस ल्याई रे मैन ।।
घर बार, मोह माया छोड़ी की हे,
बस प्रभु थै अब पाण चाहन्दु,
ज्ञान की कुटरी भ्वरणु चाहन्दु,
प्रेम रुपी प्रकाश फैलाणु चाहन्दु ।।
लड़े झगुडू से कखी दूर छु जाणू,
ज्यू जंजाल सब छोड़ी की जाणू,
यु तेरु यु मेरु कु लोभ छोड़ी की,
प्रभु की शरण मा छौं मी जाणू ।।
मिन बोली ठीक च दिदा यु भी,
समाज थै सदानी ज्ञान दीन्दा रयां,
भटकुला जब बाटु हम लोग हे,
सुबाटू हमथें सदानी दिखान्दा रयां ।।
सर्वाधिकार सुरक्षित © अनूप सिंह रावत
"गढ़वाली इंडियन" दिनांक: १३-०८-२०१२
Monday, August 6, 2012
बरखा लगी च कुमौ - गढ़वाल
रूम झुमा आई फिर बसग्याल
बरखा लगी च कुमौ - गढ़वाल
रुणझुण बरखा सौण भादो कु मैना
बरखा मा देखा सभी रुझी गैना
कखी लगी च जरा, कखी भारी
भीजी गेनी सरया छज्जा तिबारी
सारयूं मा काम काज उनी लग्यूं
डांडी कांठ्यों भारी कुयेडू च लग्यूं
आई बरखा त हरियाली बढिगे
गौं गुठ्यार मा फिर बहार ऐगे
कखी आई बिंजा त ब्वगणी हुई
कखी उजाड़ बिजाड खूब च हुई
बिधाता होई नाराज त बाढ़ आई
कैकी कुड़ी पुंगुड़ी कैकी जान गाई
हे सरगा रुण झुण बरखंदु रैयी
हे कखी उजाड़ बिजाड न कैयी
सर्वाधिकार सुरक्षित © अनूप सिंह रावत
"गढ़वाली इंडियन" दिनांक - ०६-०८-२०१२
ग्वीन, बीरोंखाल, पौड़ी गढ़वाल (उत्तराखंड)
इंदिरापुरम, गाजियाबाद (उत्तर प्रदेश)
Friday, July 27, 2012
जय देवभूमि, जय उत्तराखंड, जय ऊँचो हिमाल
द्वी हाथ जोड़ी की मेरा दगिड्यो आज बोलियाल.
जय देवभूमि, जय उत्तराखंड, जय ऊँचो हिमाल.
डांडी कांठ्यूं कु मुल्क मेरु कुमाऊँ गढ़वाल.
जय देवभूमि, जय उत्तराखंड, जय ऊँचो हिमाल.
बद्री - केदार की छत्रछाया मा मनखी बस्यान
गंगोत्री यमनोत्री का किनारा गौं का गौं बस्यान
भलु च मिजाज अर मीठी च यख बोलचाल.
जय देवभूमि, जय उत्तराखंड, जय ऊँचो हिमाल.
फूल हैंसणा छन यख ऊँची नीची डांड्यों मा
हैरी हरियाली छाई च यख गैरी-२ घाट्यों मा
देवधरा बारामास इनी रेंद गैल्या तू सुणियाल.
जय देवभूमि, जय उत्तराखंड, जय ऊँचो हिमाल.
ठंडी बयार आणि, ब्वगणी च यख गाड गदेरी
बणो ग्वरेल, पन्देरूं मा पनेरी, डांड्यों मा घसेरी
मन लुभौण्या गीत दगिड्या आज तू भी गयाल
जय देवभूमि, जय उत्तराखंड, जय ऊँचो हिमाल.
चखुला भी यख बनी-२ का डाल्यूं मा चुच्याणा
कभी यख कभी वख देखा रैबार थै पहुँचाणा
ह्वेगे सुबेर अर पोडिगे रुमुक सब यून बोलियाल
जय देवभूमि, जय उत्तराखंड, जय ऊँचो हिमाल.
काम काज का बगत सब लोग छन पुंगिड्यों मा
प्याज पिरण्या, धण्या की चटनी छन रोट्यों मा
खैर फटान कु भेली कुटुकी मा अहा च्या पियाल
जय देवभूमि, जय उत्तराखंड, जय ऊँचो हिमाल.
सर्वाधिकार सुरक्षित © अनूप सिंह रावत
"गढ़वाली इंडियन" दिनांक - २१-०५-२०१२
ग्वीन, बीरोंखाल, पौड़ी गढ़वाल (उत्तराखंड)
इंदिरापुरम, गाजियाबाद (उत्तर प्रदेश)
Monday, July 2, 2012
गढ़वाली शायरी By Anoop Rawat
याद औणी दगिड्यो की, जिकुड़ी मा मच्युं बबाल.
पुछणु छु आप से कन्ना छान आपका हाल चाल.
बिजां हुनु च गरम गैल्यों, बुरा हुयां छान हाल.
जनु भी होलू मेरा दगिड्यो रख्यां अपरू ख्याल.
सर्वाधिकार सुरक्षित © अनूप सिंह रावत
"गढ़वाली इंडियन" दिनांक-02-07-2012
ग्वीन, बीरोंखाल, पौड़ी गढ़वाल (उत्तराखंड)
इंदिरापुरम, गाजियाबाद (उत्तर प्रदेश)
Wednesday, June 13, 2012
बणों मा आग
मेरा मुल्क बणों मा आग लगी च
पौन पंछ्युं मा हाहाकार मची च..
हैरा भैरा डांडा लाल बण्या छन
डाली बोटी देखा सभ्या जलना छन
कुयेडी लौंकणी छै जौं डांड्यों मा
धुंआ ही धुंआ हुयों च उ डांड्यों मा
ग्वरेलों का गीत, घसेन्यों की दथुड़ी
ख्वेगे कखी, अर वख आग भभकणी
जान बचायी के चखुलों ता उडी गैनी
पर अंडा, फतल्या, घोल जैली गैनी
जंगली गोर भी कना भजणा छन
घास छोड़ी की ढुंग्यों मा चढ़णा छन
जौंमा छन जिम्मेदारी उ सियां छन
आग मुल्क का लोग बुझौणा छन
चला दगिड्यो बणों थैं हम बचौंला
बणों मा आग थैं हम भी बुझौंला.
सर्वाधिकार सुरक्षित © अनूप सिंह रावत
"गढ़वाली इंडियन" दिनांक - १३-०६-२०१२
ग्वीन, बीरोंखाल, पौड़ी गढ़वाल (उत्तराखंड)
इंदिरापुरम, गाजियाबाद (उत्तर प्रदेश)
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