तेरी रतन्याली आंख्युं मा, माया लैगे.
हे सुवा चितमन मेरु, अब तेरु ह्वेगे.
मनमोहण्या तेरु मिजाज, स्वाणी बोळी.
बिधाता न मेरा बाना त्वे बणाई होळी.
© अनूप सिंह रावत “गढ़वाली इंडियन”
दिनांक – १६-०२-२०१४ (इंदिरापुरम)
“ बाटू ”
बाटू,
टेढू-मेढू बाटू,
कखी उकाल, कखी उंदार,
कखी सैणु, कखी धार-धार।
बाटू,
कु होलू जाणु,
क्वी जाणु च अबाटू,
त क्वी लग्युं च सुबाटू।
बाटू,
जाणु चा बटोई,
क्वी हिटणु यखुली,
त क्वी दगिड्यों दगिडी।
बाटू,
पैंट्यां छन देखा,
क्वी च मैत आणु,
त क्वी परदेश च जाणु।
बाटू,
वै जै ‘अनूप’ ब्वनु,
जख बल मनख्यात हो,
सुकर्म मा दिन रात हो।
© अनूप सिंह रावत “गढ़वाली इंडियन”
दिनांक – ०२-०२-२०१४ (इंदिरापुरम)
:: गढ़वाली गीत ::
बिज़ी रयुं सैरी रात, सुवा तेरो ख्याल मा.
सोची छौ नि लगौणी, फंसिग्युं मायाजाल मा..
- गीत जारी है .....
© अनूप सिंह रावत “गढ़वाली इंडियन”
दिनांक – ३१-०१-२०१४ (इंदिरापुरम)
कभी-2 हम भी कलम चला लेते हैं।
बस दिल की भावनाओं को,
कागज पर उकेर लेते हैं।।
- अनूप सिंह रावत (28-01-14)
साथ हमारू जन्मों जन्मों कु चा,
यनु च जनु माछी पाणी कु चा..
ऊंका दिल मा मी, उ मेरा दिल मा,
सरैल द्वी अर चितमन एक चा...
© अनूप सिंह रावत “गढ़वाली इंडियन”
दिनांक – ३१-१०-२०१३ (इंदिरापुरम)
चितमन तेरु ह्व़े सुवा मेरी,
तू ही छै हे दुन्या सुवा मेरी.
होरी जपणा छन हरि राम,
अर मैं छौं जपणु तेरो नाम.
मोर पंख होर्युं कु किताब तीर,
मेरी किताब मा तेरी तस्वीर.
दगिडया पौंछि गैनी पोर धार,
अर मैं छौं बैठ्यों तेरो इंतजार.
मेरी माया न समझी तू खेल,
औ प्रीत लगोंला डाल्युं छैल.
सर्या गौं मुलुक तेरी मेरी हाम,
छोड़ दे डैर सुवा मेरु हाथ थाम.
जल्मों बिटिन बंधन तेरु मेरु,
गीत प्रीत का गालू जमानु सैरु.
© अनूप सिंह रावत “गढ़वाली इंडियन”
दिनांक – २९-१०-२०१३ (इंदिरापुरम)
तुमसे भेंटेणा कु खेदेणु छौं.
माया कु तुम्हारु रोगी छौं.
रौडी दौड़ी ऐजा मेरी सुवा,
जून देखि मन बुथ्याणु छौं.
© अनूप सिंह रावत “गढ़वाली इंडियन”
दिनांक – २५-१०-२०१३ (इंदिरापुरम)
हे छोरी माया लगाणु कु भट्याणी,
तेरी गोरी उज्याली जून सी मुखुड़ी।
जब बिटिन देखि त्वे हे जिया बांद,
बस मा नीच हे छोरी मेरी जिकुड़ी।।
© अनूप सिंह रावत "गढ़वाली इंडियन"
दिनांक - ०४-१०-२०१३ (इंदिरापुरम)
बिन त्यारा रूड़ी कु घाम सी,
तेरो आण से बसंत सी बहार।
बर्खौणी रै माया चौमास सी,
रुझुणु रौं मी, रौ माया कु बुखार।।
- अनूप रावत "गढ़वाली इंडियन"
दिनांक - 23-09-13 (इंदिरापुरम)
तू खुदेणी वख, मी यख,
या कनि प्रीत तेरी मेरी।
सदनी बिटि ही राई सुवा,
या दुन्या प्रीत की वैरी।।
© अनूप सिंह रावत "गढ़वाली इंडियन"
दिनांक - 19-09-2013 (इंदिरापुरम)
तू जून सी जुन्याली।
घुघती सी तेरी सांखी।
ओंटिडी तेरी चुप रैन्दि।
प्रीत बिगांदी तेरी आँखी।
तेरा नाक नथुली।
स्वाणी गौला हंसुली।
स्वाणी माथा बिंदुली।
ह्युं सी तेरी दंतुडी।
आंछिर सी रूप तेरो।
जिया लूछी लीगो मेरो।
चित मन मा तू ही छै।
तू ही सुपिन्यों मा छै।
तेरु ही नौं छू जपणु।
बिन त्वे मन नि लगणु।
सांची प्रीत तेरी मेरी।
सरी दुनिया च देखणु।
सुपिन्या सच करी द्यूं।
त्वे फूलमाला पैने द्यूं।
सबका समिणी आज त्वे।
औ सुवा अपडी बणे द्यूं।।
© अनूप रावत "गढ़वाली इंडियन"
17-09-2013 (इंदिरापुरम)
न लगो तू मिठी-मिठी छ्वीं बता,
तेरी छुयों मा अलिझे नि जों कखि.
बौल्या समझुणु रों जमानु मिथे,
अर मैं त्वैमा माया लगाणु रों कखि..
© अनूप सिंह रावत “गढ़वाली इंडियन”
दिनांक – ०४-०९-२०१३ (इंदिरापुरम)