तू भी न
कतगा सेल्फ़ी
पोस्ट करदी
तेरी फोटू
देखण मा ही
बिजी रैन्दू
काम-काज
बिसरी जांदू
ब्याली ता
बॉस न भी
देखी द्याई
अर वार्निंग दे
कि या त काम
या त यू नेट
हे राम !!
अब क्या होलु
काम-काज भी
जरूरी च
अर तेरी फोटू
देखण भी..
तेरी फोटू
लाइक नि करलू
त तू नाराज
अर काम-काज
नि करलू त
बॉस नाराज
यू कन्नू जंजाल मा
अलिझे ग्यों मी!!
© अनूप सिंह रावत "गढ़वाली इंडियन"
ग्वीन, बीरोंखाल, पौड़ी (उत्तराखंड)

कतगा दा
बोली त्वेकु
तिन स्वीणु मा
नि आणू..
अर जब
ऐ भी जांदी
त मिथे
तिन अपड़ी
मिठी-२ छुयों मा
नि अलझाणु..
ब्याली रात फिर
तेरी छुयों मा
खोयों रौं मी
मयाली बातों मा
अलिझे ग्यों मी
अर फतम !!
भंया पोडि ग्यों..
तू त बिचारि
टुप्प सियीं रै होलि
अर मी सरि रात
दर्द से म्वरुणु रौं
तेरा माया कु रोग
निरभै बिजी रौं.!!!
© अनूप सिंह रावत "गढ़वाली इंडियन"
दिनांक: 28-06-2017 (बुधवार)
पहाड़ मा
पहाड़ ही
रूणा छन.
पलायन,
बेरोजगारी,
की मार देखि.
सबसे ज्यादा
जू कर्ता छि,
जू धर्ता छि,
तौं नेतों,
अफसरों कु,
व्यवहार देखि..
सुखदा पाणी का,
मंगर्युं देखि.
परदेश बगदा,
मनिख्युं देखि.
शिक्षा की,
गुणवत्ता देखि.
हस्पतालों का,
खस्ता हाल देखि,
उजिडीदी कुड़ी,
बांजी पुंगडी देखि..
बंद हुंदा,
बाटो देखि.
परदेश जांदी,
सदिक्यों देखि.
आग से फुकेंदा,
जंगलों देखि.
कम हुंदा,
पौन पंछ्यों देखि..
© अनूप सिंह रावत #GarhwaliIndian
ग्वीन मल्ला, बीरोंखाल, पौड़ी गढ़वाल (उत्तराखंड)
यूं आंख्युं मा तुम्ही छौ.
ये मन मा तुम्ही छौ..
भाग्य मा तुम्ही छौ.
जीवन मेरो तुम्ही छौ..
COPYRIGHT © ANOOP SINGH RAWAT
बल
11 तारीख़
चुनौ कु
नतीजों ळ आण
नेतों कु क्या
क्वी जीतळु
क्वी हारळु
पर जनता कु
क्या होळु
कुजाण !!!
© अनूप सिंह रावत
ग्वीन मल्ला, बीरोंखाल
पौड़ी (उत्तराखंड)
बळ मी मतदाता छौं
बळ मी मतदाता छौं..
जणदू छौं मी भी खूब.
चुनौ कु बगत च अचगाळ,
इलै देवतों जनु पुजेणु छौं...
मान मनोबल हुणु च,
बातों मा खूब अल्झेणु च.
ब्याली तक पिचगाणु छायी,
आज ऊ गौल़ा भेंटेणु च...
पर मी बातों मा नि आणु छौं..
हाथ, फूल, कुर्सी, सैकल, हाथी,
छोटा दल, निर्दल सभ्या साथी.
नेता अगने-२, पिछने-२ चमचा,
मुंड टोपल़ा, गात पर खादी...
सभ्युं थै गौर से देखणु छौं..
पोटलों मां बांधी रख्यां वादा,
अर बुशल्या भाषण देणा छी.
पांच साल जू पूरा नि काया,
ऐंसू ऊनि लेकि फिर अयां छी...
टक्क लगै की मी सुणनों छौं..
भै-बैण्यों कु रिश्ता जोड़ना,
काका-काकी, बोड़ी-ब्वाडा ब्वना.
हाथ ज्वड़े खूब हूणी च,
मीठी-मीठी छ्वीं-बता कना...
बळ मी तुम्हरू ही अपडू छौं..
ब्याली तक यूं जै गौं कु,
अता न पता छायी..
बाटू बिरडीगे छाया ज़ख कु,
अचाणचक ऊ याद आयी...
ब्वना हम भी ये गौं क छौं..
आवा दिदों-भुल्यों आवा,
मतदान जरुर कन्नु जौंला.
विकास कारला जू पहाड़ कु,
इनु नेता थैं ऐंसू जितोंला..
सोच समझी वोट देणु जाणु छौं..
© 08-02-2017 (बुधवार)
अनूप सिंह रावत “गढ़वाली इंडियन”
ग्वीन मल्ला, बीरोंखाल, पौड़ी (उत्तराखंड)
मूसा बिरवाळु सी लड़ना छौ,
जु नेता ब्याली तक।
आज ऊंमा राम - लक्ष्मण सी,
भै - भयात ह्वेगेनी।
सोचणु रु मुंड मा हाथ धैरी की,
यु चमत्कार होई ता क्यान होई ?
फिर सुणि मिन बल,
चुनौ कु शंखनाद ह्वेगेनी।।
© 19-01-2017
अनूप रावत "गढ़वाली इंडियन"
बेटी बचाओ - मिशन “गुल्लक गुडिया”
जीना है उसे भी इस दुनिया में,
कोई तो उसकी पुकार सुन लो..
बोझ नहीं बनेगी वो तुम पर,
थोड़ा ही सही मगर प्यार दे दो...
बेटा नहीं, बेटी है गर्भ में,
आधुनिक दुनिया में जान लिया..
जन्म से पहले ही उसको,
क्यों मारने का ठान लिया...
गर्भ में जो न मार सके तो,
पैदा होते ही उसे फेंक दिया..
ज़माने को ख़बर न हो उसकी,
अंधेरी रातों का सहारा लिया...
अगर कोई उसको उठा कर,
पाल-पोष कर बढा रही है..
तो कुछ दरिंदों की नजर,
मासूम सी जान पर रही है...
वो तो बस इस जहां में,
सुकून से जीना चाहती है.
मौका दो उसके सपनों को,
वो उडान भरना चाहती है...
पापा का सर पर हाथ,
माँ की उसको गोद चाहिए,
भाइयों के संग खेलना है,
प्यारा सा परिवार चाहिए...
बेटी पर ही क्यों पाबंदी,
रीति-रिवाज, संस्कारों में..
जीने दो उसको अपना जीवन,
न बंद करो उसे दीवारों में...
इतिहास के पन्नों को पलटो,
नारी की महिमा जान जाओगे..
हर रूप में उसने योगदान दिया,
शायद तब उसको बचाओगे...
© अनूप सिंह रावत “गढ़वाली इंडियन”
दिनांक : २८-१२-२०१६ (बुधवार)
ग्वीन, बीरोंखाल, पौड़ी गढ़वाल (उत्तराखंड)
इंदिरापुरम, गाजियाबाद (उत्तर प्रदेश)
छैंद मौल्यार का,
पतझड़ सी हुणु च।
आज एक, भोळ हैंकु,
पलायन करदु जाणु च।।
झणी क्या जी खोजणा छी,
झणी क्या पौणा की च आस।
पाणी का जना ऊंदरी ब्वग्णा,
जाणा की लगि च इखरी सांस।।
खेती - पाती अर धाण-काज,
अब त बसा कु नि रायी।
रट लगि च नौकरी कना की,
खैरि खाणा हिकमत नि रायी।।
पढ़ै-लिखै कु बानु ख्वज्यों च,
जन्मभूमि से नातू तोड़ि याळ।
जण चारेक रुप्या ऐगी खीसा मा,
परदेश मा बसेरु कैरि याळ।।
हमरा पुरखों न भी यखी,
गुजारूं-बसेरु कैरि छौ।
खून-पसीना ळ बणाई मुलुक,
फिर हम किलै नि रै सकदौ।।
फूल-पात सब झड़दी जाणा,
यख बस जाड़ा-ब्वाटा रैगेनी।
जब तक चलणी च साँस,
पहाड़ राळु चलदु आस रैगेनी।।
बगत अभि भी सम्भलणा कु,
यों डांडी- कांठ्युं थै बचाणा कु।
उकाळ अभि काटि सकदी, काटि ले,
फिर क्वी नि राळु यख धै लगाणा कु।।
© अनूप सिंह रावत "गढ़वाली इंडियन"
दिनांक: 20-12-2016 (मंगलवार)
ग्वीन मल्ला, बीरोंखाल, पौड़ी, उत्तराखंड
शीर्षक : बगत चुनौं कु
फिर खींचताण शुरू ह्वेगे,
बगत चुनौं कु फिर ऐगे।
ब्यालि तक जु सियां छाया,
तौं नेतों की सुबेर ह्वेगे।।
जौं बाटों थै बिसरी गे छाया,
उं मा खड़ंजा बिछाण लैगे।
नेता जी आणा छि बल गौं मा,
टूटीं सड़क फिर बणन लैगे।।
कखि शिलान्यास कखि उद्घाटन,
हरच्युं बज़ट फिर आण लैगे।
विकास कार्य कीं भौत हमुन,
समाचारों मा विज्ञापन आण लैगे।।
नेता दीणा बुसिल्या भाषण,
नै-२ घोषणा फिर हूण लैगे।
विपक्षी जागि गैनी अचाणचक,
नजर तौंकि भी दूण लैगे।।
हाईकमान बिटि टिकट तय ह्वेगी,
जाति-धर्म हिसाब से टिकट देगे।
जनता थैं दीणा लोभ-लालच,
अर चमचों की पौबार ह्वेगी।।
खादी का कपड़ों मा देखा,
वोट खातिर हाथ जोड़ि ऐगे।
जागि जावा ऐंसु हे दगिड्यो,
परिवर्तन की चाबी तेरा हाथ रैगे।
© अनूप सिंह रावत "गढ़वाली इंडियन"
दिनांक: 14-12-2016 (बुधवार)
ग्वीन मल्ला, बीरोंखाल, पौड़ी, उत्तराखंड
www.iamrawatji.blogspot.in
आप सभी स्नेहीजनों को अनूप रावत का प्यार भरा नमस्कार। आज फिर एक कविता लिखने की कोशिश की है, जो कि ताज़ा राजनीतिक हालातों पर एक व्यंग्य है। आपकी प्रतिक्रियाएं इस रचना पर आमंत्रित हैं।
चलो दिल्ली,
राजनीति के दांव-पेंच,
हम भी सीख आएं।
गुमनाम हैं अभी,
चर्चित चलो बन जाएं।।
झूठी हंसी का चोला ओढ़,
शहद सी मीठी बातें,
मौकापरस्त बन जाएं।
थोड़ा झूठ, कुछ मक्कारी,
चलो हम भी सीख आएं।।
सादे वस्त्र बहुत पहन लिए,
अब बारी खादी की है,
भेष अपना बदल आएं।
जैसे भी करना पड़े,
बस कुर्सी तक पहुँच जाएं।।
विपक्षी पर कीचड़ उछाल,
खूब बुराई उसकी कर,
जनता का नेता बन जाएं।
बहुमत न मिलने पर,
फिर उसी को गले लगाएं।।
राजनीतिक लाभ के लिए,
विष भर दें लोगों में,
दंगा-फसाद भी कराएं।
जाति-धर्म के नाम पर,
संसद तक बस पहुँच जाएं।।
छोटे मोटे नेताओं से,
आंदोलन आयोजित कर,
जनता को खूब उकसाएं।
देश विरोधी लोगों को,
पीछे से समर्थन दिलवाएं।।
कुछ अलग तरह की,
राजनीति करेंगे बोलकर,
कुर्सी के दावेदार बन जाएं।
पहले से गंदी राजनीति को,
और भी गंदा कर आएं।।
© अनूप सिंह रावत "गढ़वाली इंडियन"
दिनांक : 06-10-2016 (इंदिरापुरम)
मन में उथल-पुथल का हल ढूंढ रहा हूँ।
वजह से या बेवजह कुछ पूछ रहा हूँ।।
बरसात, धुप, सर्दी में एक किसान,
देश के लिए अन्न उगाता है।
पूरी ताकत झकझोर देता वो,
फिर भी लोन नहीं चुका पाता है।
समस्या का समाधान पूछ रहा हूँ।।
देवी स्वरूप नारी को हर दिन,
अपने बजूद से जूझना पड़ता है।
कहीं बलात्कार, कहीं दहेज़ उत्पीडन,
नित दिन घुट-२ कर जीना पड़ता है।
क्यों भ्रूण हत्या करदी पूछ रहा हूँ।।
दिन-दुगुनी, रात-चौगुनी बढ़ती महंगाई,
शिक्षा का गिरता स्तर, बढ़ता भ्रष्टाचार।
कहीं कुपोषण, तो कहीं होता शोषण,
घटती वफ़ादारी और बेरोजगारी की मार।
कैसे जीवन-यापन होगा पूछ रहा हूँ।।
जाति-धर्म के नाम पर बंटे हैं लोग,
कभी यहाँ, कभी वहां दंगे होते।
बिना मौत के मर जाते कई लोग,
कोई अस्पताल में बदहाली पर रोते।
गिरती राजनीति का उपाय ढूंढ रहा है।।
…........ कविता जारी है
© अनूप सिंह रावत "गढ़वाली इंडियन"
ग्वीन मल्ला, बीरोंखाल, गढ़वाल (उत्तराखंड)
दिनांक: 10 सितंबर 2016