जीवन की गाड़ी धकेले रे मनखी, बाटू च अभी बडू दूर.
भाग मा त्यारा जू कुछ भी होलू, एक दिन त्वे मिललू जरूर.
करम करदी जा, धरम करदी जा ...................
अधर्म कु बाटू भेल ली जांदू, धर्म कु बाटू स्वर्ग मा जांदू.
जैका जनि कर्म हे मनखी, फल भी दगिद्या ऊनि पांदू.
जाति-पांति सब भेदभाव छोड़, सब च वै विधाता की नूर.
जीवन की गाड़ी ....... भाग मा त्यारा ..........
फूलों कु बाटू बण्यूं च त्वेकू, कांडों का बाटा किलै छै जाणु.
सब कुछ पाके भी से बाटा मनखी, त्वेन कभी सुख नि पाणु.
दया धर्म कु बाटू जा रे मनखी, ना बण तू हे इतगा क्रूर.
जीवन की गाड़ी ....... भाग मा त्यारा ..........
बगत कभी रुक्युं नि रांदु, आदत येकी भी मनखी जनि च.
सब कुछ च त्वैमा हे मनखी, बस एक धीरज की कमि च.
मनखी चोला माटा कु च रे, चखुलू सी उड़ी जालू फूर.
जीवन की गाड़ी ....... भाग मा त्यारा ..........
रंग ही नि हुंदू फूलों की पछ्यांण, कांडों ना भी पछ्यांण हुंद.
रंग रूपल नि पछ्नेंदु मनखी, वैका कर्मों न पछ्याण हुंद.
प्रेम कु कल्यों त्वैमा रे मनखी, बांटी सकदी बांटी ले भरपूर.
जीवन की गाड़ी ....... भाग मा त्यारा ..........
पालू सदानी नि रैंदु चमकुणु, घाम आण मा सर्र गैली जान्द.
पाप की गठरी नि बाँध रे, पाप कु घाडू फट्ट फूटी जान्द.
अहम् छोड़ी दे रे दगिद्या, न कैर मनखी तू भंड्या गुरूर.
जीवन की गाड़ी ....... भाग मा त्यारा ..........
© अनूप सिंह रावत “गढ़वाली इंडियन”
दिनांक – २८-०१-२०१५ (इंदिरापुरम)
*** गढ़वाली शायरी ***
फूलों थैं क्या देखण, त्वे देखियाली.
भोली अन्वार तेरी, दिल मा बसैयाली.
प्रीत लागी गे, हे सुवा त्वैमा मेरी.
सबका सामणी आज, मिन बोलियाली..
© अनूप सिंह रावत “गढ़वाली इंडियन”
दिनांक – १७-०१-२०१५ (इंदिरापुरम)
गीत : बाजूबंद गीत गाणी हो
दाथुड़ी लेकि घासा कु जांदी,
ग्वरेल छोरों की बांसुरी सूणी,
स्वामी की खुद मा खुदेणी हो.
वा बैठी डाल्युं का छैल,
घास घसेन्यों का गैल,
बाजूबंद गीत गाणी हो ...
कै दिन मैना बीती साल,
स्वामी बौडी घार नि आया,
पापी नौकरी का बाना,
द्वी जनों कु बिछड़ो हुयुं च,
स्वामी राजी ख़ुशी रयां,
देवतों थैं वा मनाणी हो ...
वा यखुली पहाड़ मा,
ऊनि काम काज सार्युं कु,
ऊनि दुध्याल नौन्याल,
स्वामी का खातिर वींकी,
घ्यु की ठेकी भोरियाल,
तू हिकमत ना हारी हो ...
आंखी थकी बाटू देखि-२,
दिन याद मा धक्याणी,
बुढ्या सासु ससुर की सेवा,
अपडू ब्वारी धर्म निभाणी,
धन त्वेकू पहाड़ा की नारी,
रै सदानी सुहागिणी हो ...
बाजूबंद गीत गाणी हो ...
बाजूबंद गीत गाणी हो ...
© अनूप सिंह रावत “गढ़वाली इंडियन”
दिनांक – ०३-०१-२०१५ (इंदिरापुरम)
कख छै सुवा, कख तू लुकी रे,
मन की पीड़ा त्वेन जाणी ना.
तेरो नाम ए दिल मा लेखी सकी ना ...
आकाश मा खोजे, धरती मा भेंटि सकी ना,
तेरी याद मा आंख्युं बिटी आंसू बरखदा,
निठुर दुन्या न रोकी सकी ना .....
ऐजा सुवा, त्वे बिगैर ज्यू सकदु ना ...
गीत जारी है ........
अनूप सिंह रावत “गढ़वाली इंडियन”
दिनांक – ३०-१२-२०१४ (इंदिरापुरम)
तेरी आंख्युं का सौं, प्यार त्वेसे करुदु छौं.
यूं सांसों का सौं, त्वे पर मी मरुदु छौं.
सच माण या न माण, तू हे मेरी दगिद्या,
साँची माया मी, त्वेसणी करुदु छौं ...
© अनूप सिंह रावत “गढ़वाली इंडियन”
दिनांक – २३-११-२०१४ (इंदिरापुरम)
*** गढ़वाली शायरी – अनूप रावत ***
संसार भूली ग्युं मी त्वे देखि की.
तुमसणी अपड़ा दिल मा समझिकी.
मी पूजा करदू माया की .....
तुम्हारी इच्छा हे सुवा, साथ दे, न दे,
मी शरण ऐग्युं तुम्हारी माया की ...
© अनूप सिंह रावत “गढ़वाली इंडियन”
दिनांक – १७-१०-२०१४ (इंदिरापुरम)

*** गढ़वाली शायरी ***
जब बिटिन देखि त्वेथै सुवा,
सुपिन्या त्यारा ही देखणु छौं।
तेरी माया कु रोगी बणिग्युं,
नौ दिन राति तेरु ही जपणु छौं।।
© अनूप सिंह रावत "गढ़वाली इंडियन"
दिनांक - ०९-१०-२०१४ (इंदिरापुरम)
सुपिन्यों मा आंदी, निंद चुरै कि ली जांदी.
तेरी मयाली मुखुड़ी देखी, जिकुड़ी धकद्यांदी.
तू छै बांदों मा की बांद, चांदों मा की चाँद,
बांद गढ़वाल की ..... बांद पहाड़ा की .....
© अनूप सिंह रावत “गढ़वाली इंडियन”
दिनांक – १९-०९-२०१४, (इंदिरापुरम)
फ्योली सी मुखुड़ी तेरी दमकणी,
नाका की नथुली भली सजणी..
धवल ह्युं जनि दांतुड़ी चमकणी,
डांड्यू आंछिरी सी स्वाणी लगणी..
© अनूप सिंह रावत “गढ़वाली इंडियन”
दिनांक – १३-०९-२०१४ (इन्दिरापुरम)
छोड़ी की ईं दुन्यादारी थैं आज हम,
औ लठ्याली, माया कु घोळ बणोंला,
ईं माया बैरी दुन्या से चल दूर कखि,
स्वर्ग जनु सुंदर एक घर बणोंला।।
© अनूप सिंह रावत, दिनांक – 02-09-14
ग्वीन मल्ला, गढ़वाल (इंदिरापुरम)
देवभूमि त्वे भट्याणी च,
सूणी ले रे हे दगिड्या,
कब बिटि की धै लगाणी च,
बौडी आवा, लौटी आवा । 1।
तिबारी डिंडाळी भट्याणी च,
उरख्याली-गंज्याली भट्याणी च,
बौडी आवा, लौटी आवा । 2।
बांजी हूंदी पुंगड़ी भट्याणी च,
डांडी - कांठी भट्याणी च,
बौडी आवा, लौटी आवा । 3।
पहाड़ की रीत भट्याणी च,
बारामासी गीत भट्याणी च,
बौडी आवा, लौटी आवा । 4।
रौली - गदेरी भट्याणी च,
घासा की घसेरी भट्याणी च,
बौडी आवा, लौटी आवा । 5।
पाणी की पन्देरी भट्याणी च,
घुघुती-हिलांश भट्याणी च,
बौडी आवा, लौटी आवा । 6।
जन्दुरु-घराट भट्याणी च,
उजड़ी कूडी-छानि भट्याणी च,
बौडी आवा, लौटी आवा । 7।
टेढ़ी-मेढ़ी बाटी भट्याणी च,
ऊँची-नीचि घाटी भट्याणी च,
बौडी आवा, लौटी आवा । 8।
बसग्याल- ह्युंद-रूडी भट्याणी च,
छुणक्याळी दाथुड़ी भट्याणी च,
बौडी आवा, लौटी आवा । 9।
तांबा की गगरी भट्याणी च,
लोखर की भद्याली भट्याणी च,
बौडी आवा, लौटी आवा । 10।
फूलों की डाली भट्याणी च,
हैरी भैरी सारी भट्याणी च,
बौडी आवा, लौटी आवा । 11।
भभरांदी आग भट्याणी च,
च्या की केतली भट्याणी च,
बौडी आवा, लौटी आवा । 12।
फाणु - झोळी भटयाणी च,
कोदा की रोटि भट्याणी च,
बौडी आवा, लौटी आवा । 13।
धार कु मंदिर भट्याणी च,
देवों थौल - जात्रा भट्याणी च,
बौडी आवा, लौटी आवा । 14।
थौला-मेला भट्याणी च,
देवभूमि त्वे भट्याणी च,
बौडी आवा, लौटी आवा । 15।
© अनूप सिंह रावत, दिनांक - २४-०८-२०१४
इंदिरापुरम, गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश
ग्वीन, बीरोंखाल, गढ़वाल, उत्तराखंड
बाँध कलाई पर आज रक्षासूत्र,
ओ जग से प्यारी बहना मेरी।
देता हूँ वचन तुझको मैं आज,
रक्षा करूंगा मैं ता-उम्र तेरी।।
- अनूप सिंह रावत (०८-०८-२०१४)