देवभूमि त्वे भट्याणी च,
सूणी ले रे हे दगिड्या,
कब बिटि की धै लगाणी च,
बौडी आवा, लौटी आवा । 1।
तिबारी डिंडाळी भट्याणी च,
उरख्याली-गंज्याली भट्याणी च,
बौडी आवा, लौटी आवा । 2।
बांजी हूंदी पुंगड़ी भट्याणी च,
डांडी - कांठी भट्याणी च,
बौडी आवा, लौटी आवा । 3।
पहाड़ की रीत भट्याणी च,
बारामासी गीत भट्याणी च,
बौडी आवा, लौटी आवा । 4।
रौली - गदेरी भट्याणी च,
घासा की घसेरी भट्याणी च,
बौडी आवा, लौटी आवा । 5।
पाणी की पन्देरी भट्याणी च,
घुघुती-हिलांश भट्याणी च,
बौडी आवा, लौटी आवा । 6।
जन्दुरु-घराट भट्याणी च,
उजड़ी कूडी-छानि भट्याणी च,
बौडी आवा, लौटी आवा । 7।
टेढ़ी-मेढ़ी बाटी भट्याणी च,
ऊँची-नीचि घाटी भट्याणी च,
बौडी आवा, लौटी आवा । 8।
बसग्याल- ह्युंद-रूडी भट्याणी च,
छुणक्याळी दाथुड़ी भट्याणी च,
बौडी आवा, लौटी आवा । 9।
तांबा की गगरी भट्याणी च,
लोखर की भद्याली भट्याणी च,
बौडी आवा, लौटी आवा । 10।
फूलों की डाली भट्याणी च,
हैरी भैरी सारी भट्याणी च,
बौडी आवा, लौटी आवा । 11।
भभरांदी आग भट्याणी च,
च्या की केतली भट्याणी च,
बौडी आवा, लौटी आवा । 12।
फाणु - झोळी भटयाणी च,
कोदा की रोटि भट्याणी च,
बौडी आवा, लौटी आवा । 13।
धार कु मंदिर भट्याणी च,
देवों थौल - जात्रा भट्याणी च,
बौडी आवा, लौटी आवा । 14।
थौला-मेला भट्याणी च,
देवभूमि त्वे भट्याणी च,
बौडी आवा, लौटी आवा । 15।
© अनूप सिंह रावत, दिनांक - २४-०८-२०१४
इंदिरापुरम, गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश
ग्वीन, बीरोंखाल, गढ़वाल, उत्तराखंड
बाँध कलाई पर आज रक्षासूत्र,
ओ जग से प्यारी बहना मेरी।
देता हूँ वचन तुझको मैं आज,
रक्षा करूंगा मैं ता-उम्र तेरी।।
- अनूप सिंह रावत (०८-०८-२०१४)
मुल-मुल हैंसी की किलै भरमांदी.
छ्वी लगाणा कु तू बानु खुज्यांदी.
मन की मन मा किलै तू दबांदी.
प्रीत च त हे छोरी किलै नि बिंगांदी.
सर्वाधिकार सुरक्षित © अनूप सिंह रावत
दिनांक – २७-०७-२०१४ (इंदिरापुरम)
न लगो तू मिठी-मिठी छ्वीं बता,
तेरी छुयों मा अलिझे नि जों कखि.
बौल्या समझुणु रों जमानु मिथे,
अर मैं त्वैमा माया लगाणु रों कखि..
© अनूप सिंह रावत “गढ़वाली इंडियन”
दिनांक – ०४-०९-२०१३ (इंदिरापुरम)
कॉलेज का दिनों की छोरी,
आज भी प्रीत त्वैमा ही चा।
फेसबुक ट्विटर कु पासवर्ड,
सची अब भी तेरु ही नौ चा।।
- अनूप सिंह रावत "ASR"
मायादार रूपसी मेरी कख बिटिन ऐयी होळी।
रंगरूप कु स्यू खजानु कख बिटिन पै होळी।।
त्वे बणोंन बिधाता न क्वी कसर नी छोडि होळी।
मायादार रूपसी मेरी कख बिटिन ऐयी होळी।।
Song Continues...
© अनूप सिंह रावत 06-06-2014
ग्वीन मल्ला, गढ़वाल (उत्तराखंड)
शुक्रिया करूं उस खुदा का,
ऐ सनम जिसने तुझे बनाया।
या करूं मैं उस पल का,
जिसने मुझे तुझसे मिलवाया।।
©15-05-14 अनूप रावत
इंदिरापुरम (ग्वीन मल्ला)
झणी क्या जादू करि तुमुन,
झणी कन्नु रोग लगी ग्यायी.
जून सी जुन्याली मुखुड़ी तुम्हारी,
हे सुवा मेरा मन मा बसी ग्यायी.
© अनूप सिंह रावत “गढ़वाली इंडियन”
दिनांक – १३-०५-२०१४ (इंदिरापुरम)
।। रावत बोल वचन, भाग-2 ।।
डिग्री है डिप्लोमा है, सिर्फ नहीं है काम।
जीवन यापन कैसे करे, हर दिन बढ़े है दाम।1।
शायद मुझे भी लग गया, अनूठा प्रेम का रोग।
खोए खोए से रहते हो, कहते हैं अब सब लोग।2।
आया वक्त चुनाव का, नेताओं का लगा जमघट।
हाथ जोड़े गले लगे अभी, बाद कहेंगे चल हट।3।
घर-घर दीपक ज्ञान का, चलो जलाएं आज।
जन-जन को शिक्षित करें, खुशहाल होगा समाज।4।
जाति धर्म अब बहुत हुआ, आओ बढ़ाएं भाईचारा।
मिल-जुलकर प्रगति करें, जग विख्यात हो देश हमारा।5।
© अनूप सिंह रावत - 24-04-2014
ग्वीन मल्ला, बीरोंखाल, पौड़ी, उत्तराखंड
इंदिरापुरम (गाजियाबाद)
रात्यूं की निंद उडिगे, ख्वेगे दिन कु चैन.
झौल माया की या कनि लगाई छोरी त्वैन.
मेरा बस मा नि राई यु बालु मन अब मेरु,
सची यु ज्यू जान तेरा नौ करियाली मैन...
© अनूप सिंह रावत “गढ़वाली इंडियन”
दिनांक – ०८-०३-२०१४ (इंदिरापुरम)
ढोल दमौ मेरु पहाड़ा कु साज।
रांसु मंडाण लगि जब भी बाज।।
- अनूप रावत "गढ़वाली इंडियन"
तेरी रतन्याली आंख्युं मा, माया लैगे.
हे सुवा चितमन मेरु, अब तेरु ह्वेगे.
मनमोहण्या तेरु मिजाज, स्वाणी बोळी.
बिधाता न मेरा बाना त्वे बणाई होळी.
© अनूप सिंह रावत “गढ़वाली इंडियन”
दिनांक – १६-०२-२०१४ (इंदिरापुरम)