Friday, March 14, 2014

गढ़वाली शायरी - ASR

रात्यूं की निंद उडिगे, ख्वेगे दिन कु चैन.
झौल माया की या कनि लगाई छोरी त्वैन.
मेरा बस मा नि राई यु बालु मन अब मेरु,
सची यु ज्यू जान तेरा नौ करियाली मैन...

© अनूप सिंह रावत “गढ़वाली इंडियन”
दिनांक – ०८-०३-२०१४ (इंदिरापुरम)

ढोल दमौ

ढोल दमौ मेरु पहाड़ा कु साज।
रांसु मंडाण लगि जब भी बाज।।

- अनूप रावत "गढ़वाली इंडियन"

गढ़वाली शायरी - ASR

तेरी रतन्याली आंख्युं मा, माया लैगे.
हे सुवा चितमन मेरु, अब तेरु ह्वेगे.
मनमोहण्या तेरु मिजाज, स्वाणी बोळी.
बिधाता न मेरा बाना त्वे बणाई होळी.

© अनूप सिंह रावत “गढ़वाली इंडियन”
दिनांक – १६-०२-२०१४ (इंदिरापुरम)

Tuesday, February 11, 2014

गढ़वाली कविता - बाटू

“ बाटू ”

बाटू,
टेढू-मेढू बाटू,
कखी उकाल, कखी उंदार,
कखी सैणु, कखी धार-धार।

बाटू,
कु होलू जाणु,
क्वी जाणु च अबाटू,
त क्वी लग्युं च सुबाटू।

बाटू,
जाणु चा बटोई,
क्वी हिटणु यखुली,
त क्वी दगिड्यों दगिडी।

बाटू,
पैंट्यां छन देखा,
क्वी च मैत आणु,
त क्वी परदेश च जाणु।

बाटू,
वै जै ‘अनूप’ ब्वनु,
जख बल मनख्यात हो,
सुकर्म मा दिन रात हो।

© अनूप सिंह रावत “गढ़वाली इंडियन”
दिनांक – ०२-०२-२०१४ (इंदिरापुरम)

बिज़ी रयुं सैरी रात

:: गढ़वाली गीत ::

बिज़ी रयुं सैरी रात, सुवा तेरो ख्याल मा.
सोची छौ नि लगौणी, फंसिग्युं मायाजाल मा..

- गीत जारी है .....

© अनूप सिंह रावत “गढ़वाली इंडियन”
दिनांक – ३१-०१-२०१४ (इंदिरापुरम)

हिंदी शायरी - Garhwali Indian

कभी-2 हम भी कलम चला लेते हैं।
बस दिल की भावनाओं को,
कागज पर उकेर लेते हैं।।

- अनूप सिंह रावत (28-01-14)

Thursday, October 31, 2013

गढ़वाली शायरी - अनूप सिंह रावत

साथ हमारू जन्मों जन्मों कु चा,
यनु च जनु माछी पाणी कु चा..
ऊंका दिल मा मी, उ मेरा दिल मा,
सरैल द्वी अर चितमन एक चा...

© अनूप सिंह रावत “गढ़वाली इंडियन”
दिनांक – ३१-१०-२०१३ (इंदिरापुरम)

Tuesday, October 29, 2013

चितमन तेरु ह्व़े सुवा मेरी

चितमन तेरु ह्व़े सुवा मेरी,
तू ही छै हे दुन्या सुवा मेरी.

होरी जपणा छन हरि राम,
अर मैं छौं जपणु तेरो नाम.

मोर पंख होर्युं कु किताब तीर,
मेरी किताब मा तेरी तस्वीर.

दगिडया पौंछि गैनी पोर धार,
अर मैं छौं बैठ्यों तेरो इंतजार.

मेरी माया न समझी तू खेल,
औ प्रीत लगोंला डाल्युं छैल.

सर्या गौं मुलुक तेरी मेरी हाम,
छोड़ दे डैर सुवा मेरु हाथ थाम.

जल्मों बिटिन बंधन तेरु मेरु,
गीत प्रीत का गालू जमानु सैरु.

© अनूप सिंह रावत “गढ़वाली इंडियन”
दिनांक – २९-१०-२०१३ (इंदिरापुरम)

Friday, October 25, 2013

गढ़वाली शायरी - Anoop Rawat

तुमसे भेंटेणा कु खेदेणु छौं.
माया कु तुम्हारु रोगी छौं.
रौडी दौड़ी ऐजा मेरी सुवा,
जून देखि मन बुथ्याणु छौं.

© अनूप सिंह रावत “गढ़वाली इंडियन”
दिनांक – २५-१०-२०१३ (इंदिरापुरम)

Friday, October 4, 2013

गढ़वाली शायरी - अनूप रावत

हे छोरी माया लगाणु कु भट्याणी,
तेरी गोरी उज्याली जून सी मुखुड़ी।
जब बिटिन देखि त्वे हे जिया बांद,
बस मा नीच हे छोरी मेरी जिकुड़ी।।

© अनूप सिंह रावत "गढ़वाली इंडियन"
दिनांक - ०४-१०-२०१३ (इंदिरापुरम)

Monday, September 23, 2013

गढ़वाली शायरी - अनूप रावत

बिन त्यारा रूड़ी कु घाम सी,
तेरो आण से बसंत सी बहार।
बर्खौणी रै माया चौमास सी,
रुझुणु रौं मी, रौ माया कु बुखार।।

- अनूप रावत "गढ़वाली इंडियन"
दिनांक - 23-09-13 (इंदिरापुरम)

Friday, September 20, 2013

गढ़वाली शायरी - अनूप सिंह रावत

तू खुदेणी वख, मी यख,
या कनि प्रीत तेरी मेरी।
सदनी बिटि ही राई सुवा,
या दुन्या प्रीत की वैरी।।

© अनूप सिंह रावत "गढ़वाली इंडियन"
दिनांक - 19-09-2013 (इंदिरापुरम)