राती ह्वेगेन मेरी आजकल सुपन्याली.
जब से देखीं तुम्हारी आंखीं रतन्याली.!
कनि स्वाणी दिख्यांदी मुखुड़ी मयाली.
बौल्यें ग्युं माया मा तुम्हारी हे लथ्याली.!
©अनूप सिंह रावत "गढ़वाली इंडियन"
दिनांक - 20-01-2012 (इंदिरापुरम)
Friday, January 20, 2012
शायरी - अनूप रावत
Wednesday, January 18, 2012
हे बांद तेरा रूप देखिकी
हे बांद तेरा रूप देखिकी सची मैं त बौल्ये ग्यूं.
झणी क्या जादू करी तिन, माया रोगी ह्वेग्यूं...
पैली भी देखी मिन कै बांद पर त्वे जनि नि देखी
मेरु चित मन अब मैमा नि राई लीगे तू चुरैकी..
धन वै बिधाता कु हे बांद जैन त्वेई बनाई होलू.
तेरु रंग रूप बणान मा हे कै बगत लगाई होल़ू..
दिन कु चैन ख्वेगे मेरु रात्यूं की निंद उडि ग्याई.
खित - 2 हैसणु मिठु बुलाणु मन मा बसी ग्याई..
गला हँसुली नाक नथुली कानों कुंडल सज्या छां.
ज्वान बैख बौल्या बन्या बुढ्यों ज्वानी आयीं चा..
गैल्यान्यूं गैल सजी धजी की थौला मेलू आंदी.
लाखों हजारों मा तू हे बांद अलग ही दिख्यांदी..
साँची माया त्वैमा मेरी त्वेथे मै बिन्गाणु छौं.
त्वे ही ब्योली बणान मिन ब्वे-बुबों मनाणु छौं.
हे बांद तेरा रूप देखिकी सची मैं त बौल्ये ग्यूं.
झणी क्या जादू करी तिन माया रोगी ह्वेग्यूं.
सर्वाधिकार सुरक्षित © अनूप सिंह रावत
" गढ़वाली इंडियन " दिनांक -१८-०१-२०१२
इंदिरापुरम, गाजियाबाद (उत्तर प्रदेश)
Tuesday, January 17, 2012
धन धन हे मेरा पहाडा की नारी
खैरी दुःख विपदा छन त्वैकू भारी.
जनु भी होलू हे हिक्मत ना हारी..
धन धन हे मेरा पहाडा की नारी...
भेलू पखाण, डांडी कांठी घासा कु जांदी.
स्वामी जी की खुद मा, बाजूबंद लगान्दी.
सासु बेटी ब्वारी होली पहाडा घस्यारी..
धन धन हे मेरा पहाडा की नारी...
रौली गदिन्युं छ्वाल्या मा पाणी कु जांदी.
बांजा जाड्यूं कु ठंडो मीठो पाणी ल्यांदी.
मुंडमा धैरी कसेरी आणी होली पन्यारी..
धन धन हे मेरा पहाडा की नारी...
सारी पुन्गिदयूं मा रोपणी कु जाणु.
दुध्याल नौन्याल थे ऐकि बुथ्याणु.
काम काज होलू न्यरी द्वि सारी..
धन धन हे मेरा पहाडा की नारी...
प्याज पिरन्यां कंडली की भुज्जी पकाली.
कुशल रख्यां स्वामी परदेश देवतों मनाली.
बौडी आला स्वामी अबकी बारी..
धन धन हे मेरा पहाडा की नारी...
हर रूप मा तेरु ही नौ चा हे लथ्याली.
माँ बेटी ब्वारी बोडी काकी अर स्याली.
तीलू रामी गोरा ह्वेन यख महान नारी..
धन धन हे मेरा पहाडा की नारी...
सर्वाधिकार सुरक्षित © अनूप सिंह रावत
" गढ़वाली इंडियन " दिनांक - १७-०१-२०१२
इंदिरापुरम, गाजियाबाद (उत्तर प्रदेश)
Thursday, January 5, 2012
परदेश मा छौं गौं की याद औणी चा
परदेश मा छौं गौं की याद औणी चा.
ठंडा का मारा हथ खुटी कौंपणी चा.
ह्यून्दा कु मैना, भारी जड्डू हुयूंचा.
भैर देखा कनी कुयेडी लौंकिचा...
परदेश मा छौं गौं की याद औणी चा.
घौर मा रैंदु ता डांडियों मा जांदु.
छित्कुंडा, बांजा की डाली ल्यांदु.
हथ खुटी अपरी तब खूब तपै लेंदु.
ये जड्डू मा इनु नि म्वारुनु रैंदु..
द्वि रुप्युं का बाना घार छोड्यूं चा.
अपडूं से म्यारू मुख मोड्युं चा.
यखुली छौं यख खुदेणु छौं मी.
यादों मा अपडूं की रोणु छौं मी.
घार यूँ दिनों भट्ट भूजी की खाणु
छंछ्या पल्यो बाड़ी झ्वली फाणु.
दै दगड़ी निम्ब्वा की कछ्मोली.
च्या का दगड़ी भेली की डौली..
तिबारी मा बैठी की घाम तपणु
गैल्यों का गैल उ हैसणु खेलणु.
डांडियों मा उ सफ़ेद ह्यूं पोडणु.
अब परदेश मा कख बटी देखणु.
घुट घुट गौला मा भडुली लगणी चा.
बीत्यां दिनों की फिर याद औणी चा.
परदेश मा छौं गौं की याद औणी चा.
सर्वाधिकार सुरक्षित © अनूप सिंह रावत
" गढ़वाली इंडियन "
इंदिरापुरम, गाजियाबाद
Friday, December 30, 2011
नववर्ष की शुभकामनायें

आपको सपरिवार नववर्ष की शुभकामनायें.
प्रभु पूर्ण करे आपकी सारी मनोकामनाएं...
खुशियों से भरा हो संसार सदा आपका,
गमों से न भीगे कभी दामन आपका,
रब से करे बार बार सिर्फ यही दुआएं...
हर कदम पर आपको सफलता ही मिले,
खुशियों के फूल आपके आँगन में खिले,
आपके मार्ग में कभी न आये कोई बाधाएं...
रूठे न कभी आपसे आपके चाहने वाले,
प्यार देखकर दुश्मन भी गले लगाले,
इस वर्ष पूर्ण हो आपकी सम्पूर्ण आशाएं...
आप और हमारा रिश्ता यूँही जुड़ा रहे,
मुस्कान आपके चेहरे पर हमेशा रहे,
रावत अनूप प्रभु से करे इतनी ही दुआएं...
आपको सपरिवार नववर्ष की शुभकामनायें..
प्रभु पूर्ण करे आपकी सारी मनोकामनाएं...
सर्वाधिकार सुरक्षित © अनूप सिंह रावत
" गढ़वाली इंडियन "
इंदिरापुरम, गाजियाबाद
Wednesday, December 14, 2011
कवि तो कवि है
कागज कलम हाथ में लेकर वो बस लिखता ही जाएगा
हर समस्या का समाधान वो बस ढूंढता ही जाएगा.....
कवि तो कवि है वो बस लिखता ही जाएगा....
प्रकृति की सुन्दरता का मनोरम चित्रण
या रिमझिम बरसते सावन का वर्णन
बसंत ऋतु के असंख्य फूलों के हर रंग
सर्द ऋतु की ठंडी हवा और बर्फ के संग
अपनी कलम का जादू वो बस बिखेरता ही जाएगा
कवि तो कवि है वो बस लिखता ही जाएगा....
समाज में फैली कुरीतियों पर व्यंग्य कसता
भ्रष्ट नेताओ की सजी महफ़िल की पोल खोलता
जनता के हितो के लिए हमेशा कलम से लड़ता
बचना इनसे सदैव अपना सन्देश है देता रहता
अपने लेखन के हथियार से बस लड़ता ही जाएगा
कवि तो कवि है वो बस लिखता ही जाएगा....
कविता लिखने में उसे कोई मोह लोभ नहीं
वह तो बस अपनी भावना प्रकट करता है
ज्ञान के प्रकाश की रोशनी को महोदय,
अहम् रूपी अंधकार भगाने को करता है
अपनी बातों को दूसरों तक बस पहुंचाता ही जाएगा
कवि तो कवि है वो बस लिखता ही जाएगा....
कविता एक माध्यम है जो पहले भी लिखी गयी
पन्त, निराला, जयशंकर, दिनकर, महादेवी वर्मा
अज्ञेय, कबीर, रहीम, मीरा, बच्चन, बोध, शर्मा
आदि अनेक पूर्व कवियों की महान थी गरिमा
रावत अनूप भी एक छोटी सी कोशिश करता ही जाएगा
कवि तो कवि है वो बस लिखता ही जाएगा....
©अनूप सिंह रावत "गढ़वाली इंडियन"
दिनांक - 14-12-2011 (इंदिरापुरम)
Tuesday, November 22, 2011
चुनाव का वक्त एक बार फिर से हो गया
चुनाव का वक्त एक बार फिर से हो गया
नेताओ को जनता का ध्यान हो गया..
गांव गांव शहर शहर इनकी लाइन लगी है
नजर इनकी जनता के मत पर लगी है...
कितने दिनों बाद इनका सवेरा हो गया
चुनाव का वक्त एक बार फिर से हो गया
नेताओ को जनता का ध्यान हो गया..
आम हो या खास सबको हाथ जोड़ रहे हैं
मीठी मीठी बोली आज ये फिर बोल रहे हैं
ह्रदय परिवर्तन इनका आज फिर हो गया
चुनाव का वक्त एक बार फिर से हो गया
नेताओ को जनता का ध्यान हो गया..
सफ़ेद कुरता पायजामा सर पर टोपी खादी
चेले पीछे पीछे नाच रहे जैसे आज हो शादी
वादों की टोपी नेता आज फिर पहना गया
चुनाव का वक्त एक बार फिर से हो गया
नेताओ को जनता का ध्यान हो गया..
आज यहाँ कल वहां हो रही है रोज रैली
उड़ा रहे हैं जनता के रुपयों की ये थैली
ना जाने कितने रुपये का ये चूना लगा गया
चुनाव का वक्त एक बार फिर से हो गया
नेताओ को जनता का ध्यान हो गया..
दल हैं अनेक पर कर्म सबके एक हैं
वो कभी जीतता नही जिसके इरादे नेक हैं
जाग जा जनता आज सब तेरे हाथ में रह गया
चुनाव का वक्त एक बार फिर से हो गया
नेताओ को जनता का ध्यान हो गया..
सर्वाधिकार सुरक्षित © अनूप सिंह रावत
" गढ़वाली इंडियन "
इंदिरापुरम गाज़ियाबाद
Friday, November 4, 2011
कलयुग ता चा ही पर भारी कलजुग ऐगे
कतगा बदिलेगे जमानु आज कतगा बदलाव ऐगे
कलयुग ता चा ही पर भारी कलजुग ऐगे....
सुवा बणी चा गर्लफ्रेंड, सौजडया बॉयफ्रेंड ह्वेगे
माजी बणी चा मांम, अब बाबाजी डैडी ह्वेगे
रंत रैबार छुटी गैनी, अब नयु मोबाइल ऐगे
चिठ्ठी झणी कख गायी, अब इन्टरनेट ह्वेगे
छंच्या पल्यो बाड़ी गायी, चौमीन बर्गर ऐगे
च्या की केतली फुंड, कोफ़ी कोल्ड ड्रिंक ह्वेगे
ढोल दमाऊ मशकबीन अब ता कख ख्वेगे
नयु जमानु कु अब ता बल डी. ज. ऐगे...
ब्यो हुन्णु चा बाद मा, पैली ब्वारी परदेश ऐगे
बुढया ब्वे-बुबा घार मा, अब यखुली रैगे
स्कूल मा नाम दर्ज से पैली, फेसबुक मा ऐगे
स्कूल जालू की नि जालू, पैली टयूसन लैगे
नेता बणिया छन सभी, आम जनता कम ह्वेगे
गरीबो कु होरी बुरु कनु खुन, अब मंहगाई ऐगे
बीडी तम्बाकू हुक्का बंद, सिगरेट सिगार ऐगे
कच्ची का कंटर चुल्ला मा, गौं-२ मा ठेका ह्वेगे
कतगा बदिलेगे जमानु आज कतगा बदलाव ऐगे
कलयुग ता चा ही पर भारी कलजुग ऐगे....
सर्वाधिकार सुरक्षित © अनूप सिंह रावत
" गढ़वाली इंडियन "
इंदिरापुरम, गाजियाबाद
http://rawatmusic.blogspot.com
कलयुग ता चा ही पर भारी कलजुग ऐगे....
सुवा बणी चा गर्लफ्रेंड, सौजडया बॉयफ्रेंड ह्वेगे
माजी बणी चा मांम, अब बाबाजी डैडी ह्वेगे
रंत रैबार छुटी गैनी, अब नयु मोबाइल ऐगे
चिठ्ठी झणी कख गायी, अब इन्टरनेट ह्वेगे
छंच्या पल्यो बाड़ी गायी, चौमीन बर्गर ऐगे
च्या की केतली फुंड, कोफ़ी कोल्ड ड्रिंक ह्वेगे
ढोल दमाऊ मशकबीन अब ता कख ख्वेगे
नयु जमानु कु अब ता बल डी. ज. ऐगे...
ब्यो हुन्णु चा बाद मा, पैली ब्वारी परदेश ऐगे
बुढया ब्वे-बुबा घार मा, अब यखुली रैगे
स्कूल मा नाम दर्ज से पैली, फेसबुक मा ऐगे
स्कूल जालू की नि जालू, पैली टयूसन लैगे
नेता बणिया छन सभी, आम जनता कम ह्वेगे
गरीबो कु होरी बुरु कनु खुन, अब मंहगाई ऐगे
बीडी तम्बाकू हुक्का बंद, सिगरेट सिगार ऐगे
कच्ची का कंटर चुल्ला मा, गौं-२ मा ठेका ह्वेगे
कतगा बदिलेगे जमानु आज कतगा बदलाव ऐगे
कलयुग ता चा ही पर भारी कलजुग ऐगे....
सर्वाधिकार सुरक्षित © अनूप सिंह रावत
" गढ़वाली इंडियन "
इंदिरापुरम, गाजियाबाद
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Sunday, October 30, 2011
मेरु गौं
ऊँचा निचा डांडयूँ का बीच बस्युं च मेरु गौंकनु भालू स्वाणु च दगिदयो मेरु गौं.
छ्वाल्या मंगरू कु ठंडो मीठो पाणी
आम सेव काफल तिमला की दाणी
अहा क्या बिंगो कनु प्यारु च मेरु गौं
घास घसेनी बाजूबंद लगानी जख
डांडयूँ माँ ग्वरेल बांसुरी बजान्दा वख
अहा थोला मेलु माँ रंग्यु होलू मेरु गौं
सारी पुन्गिदयों माँ कम काज लग्युं
सब का सब देखा कनु काम लग्युं.
अहा पसीना मेहनत कु लतपथ मेरु गौं
ऊँचा निचा डांडयूँ का बीच बस्युं च मेरु गौं
कनु भालू स्वाणु च दगिदयो मेरु गौं.
सर्वाधिकार सुरक्षित © अनूप सिंह रावत
" गढ़वाली इंडियन "
इंदिरापुरम, गाजियाबाद
Thursday, October 27, 2011
कनु जमानु ऐगे कतगा बदलेगी आज
कनु जमानु ऐगे कतगा बदलेगी आज
भूली गेनी लोग अपरी रीति रिवाज..
ढोल दमोऊ झणी कख हर्ची गायी
मसुबाज रणसिंघा झणी कख गायी
नया जमानु कु ऐगे डी. जे. आज..
कनु जमानु ऐगे कतगा बदलेगी आज
भूली गेनी लोग अपरी रीति रिवाज..
छंच्या बाड़ी झोली झणी कख गायी
चौमीन पिज्जा बर्गर झणी क्या आयी
खाणु पीणु सब कुछ बदिलेगे आज..
कनु जमानु ऐगे कतगा बदलेगी आज
भूली गेनी लोग अपरी रीति रिवाज..
घास घसेनी गोरु का ग्वेरेल ख्वेगे
चिठ्ठी पत्री रंत रैबार कख ख्वेगे
नै जमानु कु मोबाइल ह्वेगे आज..
कनु जमानु ऐगे कतगा बदलेगी आज
भूली गेनी लोग अपरी रीति रिवाज..
अंग अंगडी फुर्क्याली घाघरी ह्वेगे गोल
कुर्ता फते मुंड मा कु टोपला ह्वेगे गोल
जींस टॉप झणी क्या-२ ऐगे आज..
कनु जमानु ऐगे कतगा बदलेगी आज
भूली गेनी लोग अपरी रीति रिवाज..
सर्वाधिकार सुरक्षित © अनूप सिंह रावत
" गढ़वाली इंडियन "
इंदिरापुरम, गाजियाबाद
भूली गेनी लोग अपरी रीति रिवाज..
ढोल दमोऊ झणी कख हर्ची गायी
मसुबाज रणसिंघा झणी कख गायी
नया जमानु कु ऐगे डी. जे. आज..
कनु जमानु ऐगे कतगा बदलेगी आज
भूली गेनी लोग अपरी रीति रिवाज..
छंच्या बाड़ी झोली झणी कख गायी
चौमीन पिज्जा बर्गर झणी क्या आयी
खाणु पीणु सब कुछ बदिलेगे आज..
कनु जमानु ऐगे कतगा बदलेगी आज
भूली गेनी लोग अपरी रीति रिवाज..
घास घसेनी गोरु का ग्वेरेल ख्वेगे
चिठ्ठी पत्री रंत रैबार कख ख्वेगे
नै जमानु कु मोबाइल ह्वेगे आज..
कनु जमानु ऐगे कतगा बदलेगी आज
भूली गेनी लोग अपरी रीति रिवाज..
अंग अंगडी फुर्क्याली घाघरी ह्वेगे गोल
कुर्ता फते मुंड मा कु टोपला ह्वेगे गोल
जींस टॉप झणी क्या-२ ऐगे आज..
कनु जमानु ऐगे कतगा बदलेगी आज
भूली गेनी लोग अपरी रीति रिवाज..
सर्वाधिकार सुरक्षित © अनूप सिंह रावत
" गढ़वाली इंडियन "
इंदिरापुरम, गाजियाबाद
Tuesday, August 9, 2011
फेसबुक FACEBOOK
आज यु फेसबुक बडू फेमस हवेगे
सरया दुनिया मा फेमस हवेगे.
दाना सयाना ज्वानू कु सारू
सभ्युं थे यु लगदु प्यारु
नना छोरु मा भी फेमस हवेगे..
यख बीती वख मिलाणु चा
खबर सार सुनाणु चा
डाकिया से भी फेमस हवेगे...
सभ्या चिपिक्या येपर यनु
अमृत की धार हो जनु
खाणु पेणु से भी फेमस हवेगे...
जनु भी चा पर अपरू चा
येकू बिना दिन नि कतेणु चा
तभी ता यु फेमस हवेगे...
आज यु फेसबुक बडू फेमस हवेगे
सरया दुनिया मा फेमस हवेगे.
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Email:- rawatmusic@live.com
सरया दुनिया मा फेमस हवेगे.
दाना सयाना ज्वानू कु सारू
सभ्युं थे यु लगदु प्यारु
नना छोरु मा भी फेमस हवेगे..
यख बीती वख मिलाणु चा
खबर सार सुनाणु चा
डाकिया से भी फेमस हवेगे...
सभ्या चिपिक्या येपर यनु
अमृत की धार हो जनु
खाणु पेणु से भी फेमस हवेगे...
जनु भी चा पर अपरू चा
येकू बिना दिन नि कतेणु चा
तभी ता यु फेमस हवेगे...
आज यु फेसबुक बडू फेमस हवेगे
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Monday, March 14, 2011
"Happy Holi"

सादे रंग को गलती से आप ना कोरा समझो,
इसी में समाये इन्द्रधनुषी सातों रंग,
जो दिखे आपको ज़िन्दगी सादगी भरी किसीकी,
तो आप यूँ समझो सतरंगी है दुनिया उसीकी,
होली आई सतरंगी रंगों की बौछार लायी,
ढेर सारी मिठाई और मीठा मीठा प्यार लायी,
आप की ज़िन्दगी हो मीठे प्यार और खुशियों से भरी,
जिसमे समाये सातों रंग यही शुभकामना है हमारी...
सर्वाधिकार सुरक्षित @ अनूप रावत
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